ट्रेन के पेंट्री कार की जिम्मेदारी किसकी?
ट्रेन की पेंट्री कमाई का जरिया
आईआरसीटीसी के लिए ट्रेन का पेंट्री कार कमाई का महत्वपूर्ण जरिया है। यह कंपनी ट्रेन के सभी पेंट्री कार के लिए टेंडर निकालती है। इस टेंडर प्रक्रिया में जो कंपनी सबसे ज्यादा बोली लगाती है, उसे कुछ अवधि के लिए उस ट्रेन में खानपान सेवा की जिम्मेदारी मिल जाती है। आजकल कुछ लोकप्रिय ट्रेनों में खानपान सेवा लेने के लिए कंपनियां करोड़ों रुपये की बोली लगा रही है।
पेंट्री लेने वाले कौन होते हैं
आईआरसीटीसी जिस भी कंपनी या फर्म को ट्रेन में खानपान सेवा का जिम्मा सौंपती है, उसे रेलवे की भाषा में लाइसेंसी कहा जाता है। कहने को तो इन लाइसेंसी पर नजर रखने के लिए आईआरसीटीसी ने पूरी व्यवस्था कर रखी है। लेकिन धरातल पर कोई व्यवस्था नहीं दिखती। ट्रेन में तो पेंट्री कार के लाइसेंसी या ठेकेदार का ही राज चलता है।
यात्रियों की क्या स्थिति रहती है
जिन्होंने रेलवे के ट्रेन में खानपान सेवा का उपयोग किया है, वे भली-भांति इन्हें जानते और समझते हैं। वे रेल यात्रा के समय घर से पूड़ी-सब्जी बांध कर चलते हैं। जिन्हें डॉक्टर ने पूड़ी-सब्जी खाने से मना किया है, वे कुछ और व्यवस्था करके चलते हैं। लेकिन जिस ट्रेन में करीब 1000 पैसेंजर चल रहे हैं, उनमें ढेरों लोग पेंट्री कार के ठेकेदार की सेवा लेते हैं। उनमें से कुछ लोग उनकी सेवाओं से तंग आ कर शिकायत भी करते हैं।
आईआरसीटीसी के सबसे खराब लाइसेंसी कौन
आईआरसीटी ने बताया है कि उसका सबसे खराब ठेकेदार आरके एसोसिएट्स एंड होटेलियर्स प्राइवेट लिमिटेड (R K Associates and Hoteliers Pvt. Ltd.) है। FY 2021 से 2024 के बीच इसके खिलाफ 1910 शिकायतें मिलीं। इसके बाद नंबर आता है क्लासिक कैटरर्स का। इस कंपनी के खिलाफ उक्त अवधि में 1439 शिकायतें आईं। तीसरे स्थान पर पी. शिव प्रसाद हैं, जिनके खिलाफ 1208 शिकायतें मिलीं। चौथे नंबर पर वृंदावन फूड प्रोडक्ट्स का नाम है जो कि आरके ग्रुप की ही कंपनी बताई जाती है। इस कंपनी के खिलाफ 1196 शिकायतें हैं। पांचवे नंबर पर एक्सप्रेस फूड सर्विसेज का स्थान है। इस कंपनी के खिलाफ 1162 शिकायतें हैं।
आईआरसीटीसी के सबसे अच्छे लाइसेंसी कौन
मिनी रत्न सरकारी कंपनी आईआरसीटसी ने बताया है कि उक्त अवधि में कपूर किचन प्राइवेट लिमिटेड, बीएच कैटरिंग सर्विसेज, कृष्णा इंटरप्राइजेज, पी के शेफी और वृंदावन इंटरप्राइजेज नाम के पांच लाइसेंसी ऐसे थे, जिनके खिलाफ महज एक-एक शिकायत दर्ज किया गया। चार साल की अवधि में सिर्फ एक शिकायत मिलना वास्तव में एक सम्मान ही है।











