प्रज्ञानानंद और कार्लसन के बीच दूसरी बाजी भी रही ड्रॉ तो कैसे होगा चैंपियन का फैसला समझिए नियम
बाकू (अजरबैजान): भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंद और वर्ल्ड नंबर वन मैग्नस कार्लसन के बीच फिडे चेस वर्ल्ड कप के फाइनल की पहली बाजी ड्रॉ रही। क्लासिकल फॉर्मेट के गेम में प्रज्ञानानंद सफेद मोहरों से खेले। प्रग्ना ने अपने से अधिक अनुभवी और काफी बेहतर रेटिंग वाले कार्लसन के खिलाफ प्रभावशाली प्रदर्शन किया। पांच बार के वर्ल्ड चैंपियन 32 साल के कार्लसन ने प्रग्ना को मिडल गेम में घेरने की कोशिश की। हालांकि, 35 चाल के बाद प्रग्ना ने उन्हें ड्रॉ के लिए राजी कर लिया।
सबसे बड़ी ताकत डिफेंस
प्रज्ञानानंद की ताकत डिफेंस है। वह बहुत तेज चाल चलने में भी माहिर हैं। इसीलिए उन्हें क्लासिकल से ज्यादा रैपिड और ब्लिट्ज गेम भाते हैं। प्रग्ना का काले मोहरों से खेलते हुए भी अच्छा रेकॉर्ड है। अपने करियर में 1790 गेम्स में उन्होंने सफेद मोहरों से 476 बाजियां जीती हैं जबकि काले मोहरों से खेलते हुए भी 418 बार प्रतिद्वंद्वियों को मात दे चुके हैं। बाकू में मौजूद ग्रैंडमास्टर श्याम सुंदर ने कहा कि प्रज्ञानानंदा के पास ऑलराउंड खेल है। उन्होंने कहा, 'प्रग्ना की सबसे बड़ी ताकतों में से एक सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ भी मुश्किल स्थिति में बचाव करने की उनकी क्षमता है। उनकी गणना करने की क्षमता उत्कृष्ट है और वह आत्मविश्वास के साथ बेहतर स्थिति को जीत में बदल सकते हैं।' श्याम सुंदर ने कहा कि प्रज्ञानानंद के पास सभी फॉर्मेट्स में अच्छा करने की क्षमता है। एक अन्य ग्रैंडमास्टर सुंदराजन किदांबी ने कहा,'प्रज्ञानानंद की प्रगति शानदार है। मैंने बचपन के दिनों से ही उन्हें देखा है। कम उम्र में इंटरनेशनल मास्टर बनना और फिर शिखर तक जाना। वह वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप जीतकर सबसे कम उम्र का ग्रैंडमास्टर भी बन सकते थे लेकिन मामूली अंतर से चूक गए थे।'











