दिसंबर तिमाही में देश की सबसे बड़ी कंज्यूमर गुड्स कंपनी हिंदुस्तान यूनीलीवर का मुनाफा 1.1 प्रतिशत ही बढ़ सका। ग्रामीण इलाकों में सुस्त डिमांड का इसमें बड़ा हाथ रहा। नैशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस ने FY 2023-24 के लिए जीडीपी का जो पहला अडवांस एस्टिमेट जारी किया है, उसके मुताबिक एग्रीकल्चर और इससे जुड़े सेक्टरों की ग्रोथ 1.8 पर्सेंट ही रहने का अनुमान है। इनवेस्टमेंट पर जोर बढ़ने के बावजूद जीडीपी में कंजम्पशन का योगदान अब भी आधे से ज्यादा है। NSO के पहले अडवांस एस्टिमेट के मुताबिक, जीडीपी में प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर का योगदान 56.9 पर्सेंट रहने का अनुमान है, जो FY 2023 में 58.5 पर्सेंट था।
गांवों पर होगा अंतरिम बजट का फोकस, खपत बढ़ाने के लिए वेलफेयर स्कीमों के जरिए सपोर्ट देना जरूरी
नई दिल्ली: जोरदार टैक्स रेवेन्यू के दम पर केंद्र सरकार अंतरिम बजट में ग्रामीण इलाकों पर फोकस बढ़ा सकती है। ग्रामीण इलाकों में साबुन, बिस्किट जैसे फास्ट मूविंग कंजयूमर गुड्स की बिक्री सुस्त पड़ने और खाने-पीने की चीजों की ऊंची महंगाई दर को देखते हुए सरकार रूरल कंजम्पशन को बढ़ावा देने वाले कदम उठा सकती है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जीडीपी ग्रोथ बढ़ाने के लिए ऐसा करना जरूरी है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के चीफ इकनॉमिस्ट डीके जोशी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों को वेलफेयर स्कीमों के जरिए सपोर्ट देना जरूरी दिख रहा है, क्योंकि कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है और ग्रामीण इलाकों में कंजम्पशन भी कमजोर है।
टैक्स रेवेन्यू में उछाल
FY23-24 के बजट में केंद्र का कुल टैक्स रेवेन्यू 33 लाख 60 हजार करोड़ रुपये रहने का अनुमान दिया गया था। रेटिंग एजेंसी ICRA की चीफ इकनॉमिस्ट अदिति नायर का कहना है, ‘मौजूदा वित्त वर्ष में केंद्र का ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू 34 लाख 20 हजार करोड़ रुपये रह सकता है। अगले वित्त वर्ष में इसके 11 प्रतिशत बढ़कर 38 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।’ हालांकि इसके चलते सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर ज्यादा बढ़ा सकने की गुंजाइश कम है। जोशी ने कहा, ‘सरकार ने कहा है कि 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के 4.5 पर्सेंट तक लाना है। इसके लिए फिस्कल कंसॉलिडेशन जरूरी हो जाता है। इंफ्रास्ट्रक्चर में इनवेस्टमेंट पर सरकार का काफी जोर था, लेकिन इसमें कमी लानी होगी, वरना राजकोषीय घाटा कम करना मुश्किल हो जाएगा। लिहाजा कैपिटल एक्सपेंडिचर ज्यादा नहीं बढ़ेगा।'
चुनाव से पहले सरकार कर सकती है ऐलान
वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ यशवीर त्यागी का कहना है, ‘कंजम्पशन की ग्रोथ कम है। अर्थव्यवस्था में जो ग्रोथ हो रही है, वह काफी हद तक सरकारी पूंजीगत निवेश की वजह से है। फूड इंफ्लेशन ऊंचे स्तर पर है। अंतरिम बजट होता तो वोट ऑन अकाउंट ही है, लेकिन बड़े ऐलान न किए जाएं, ऐसी कोई संवैधानिक रोक भी नहीं है। लिहाजा किसान सम्मान निधि की रकम 6000 रुपये के बजाय 8-10 हजार रुपये की जा सकती है। मनरेगा के लिए आवंटन बढ़ाया जा सकता है। इसमें दैनिक मजदूरी बढ़ाई जा सकती है। विश्वकर्मा सम्मान योजना सहित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं के लिए प्रावधान बढ़ाए जा सकते हैं क्योंकि यह चुनाव के पहले का बजट है।'











