सरकार की ओर से साफ किया गया है कि ऐसे मामलों में कोई भी शख्स कुल लाभ एक लाख रुपये तक का ही ले सकेगा। मसलन अगर किसी शख्स का एक साल में 25 हजार रुपये का विवाद है, दूसरे साल में 10 हजार का है, तीसरे साल 25 हजार का है, चौथे साल 25 हजार का है, पांचवें साल फिर 25 हजार का है तो उसकी कुल विवादित रकम बन गई एक लाख 10 हजार। ऐसे में उसकी सिर्फ एक लाख की ही रकम माफ होगी। बाकी रकम पर मामला चलता रहेगा। किसी साल अगर 25 हजार से ज्यादा रकम का विवाद है तो इस योजना का फायदा 25 हजार तक ही मिलेगा। वित्त वर्ष 2010-11 से लेकर 2014-15 तक की अवधि के दौरान ये फायदा एक साल में सिर्फ इस हजार तक ही होगा।
टैक्सपेयर को क्या करना होगा?
इस टैक्स डिमांड को खत्म करने का प्रोसेस इनकम टैक्स विभाग अपने आप तय करेगा। इसके लिए किसी टैक्सपेयर को आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। इस सुविधा से 1 करोड़ टैक्सपेयर्स को फायदा होगा और टैक्स सिस्टम पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा। आज जिन करदाताओं की ऐसी डिमांड सामने आती हैं, उनकी पहली प्रतिक्रिया ये होती है कि हमें तो इसके बारे में कभी बताया ही नहीं गया। ऐसे में सरकार की इस योजना से छोटे करदाताओं को काफी फायदा होगा।











