मंत्रालय ने सोमवार को चमड़ा और कपड़ा निर्यातकों से बात की। मंत्रालय ने कहा कि वे अपना उत्पादन बढ़ाएं। साथ ही सप्लाई चेन को भी मजबूत करें। मंत्रालय ने कहा कि इन उद्योगों को बाजार में ज्यादा पहुंच मिलेगी। बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा हुई। मंत्रालय चाहता है कि निर्यातक इस मौके का पूरा फायदा उठाएं। इस समझौते से देश भर के मैन्युफैक्चरिंग हब को फायदा होगा, नई नौकरियां पैदा होंगी। खासकर MSME, कारीगरों, महिला उद्यमियों और युवाओं को बेहतर मौके मिलेंगे।
क्या हुई है डील और क्या होगा फायदा?
भारत और यूके के बीच हुए व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) से यूके ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क को हटा दिया है। पहले यह शुल्क चमड़े के सामान पर 2% से 8%, चमड़े के जूतों पर 4.5% और बिना चमड़े के जूतों पर 11.9% तक था। इससे बांग्लादेश, कंबोडिया और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले भारतीय निर्यातकों को बराबरी का मौका मिलेगा, जिन्हें पहले से ही यूके के बाजार में तरजीह मिलती थी। ड्यूटी-फ्री मार्केट एक्सेस से रेडीमेड गारमेंट्स, होम टेक्सटाइल, कालीन और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों को लाभ होगा और एक्सपोर्ट में तेजी आएगी।क्या हुई बैठक में चर्चा?
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को टेक्सटाइल, चमड़ा और जूता उद्योग के हितधारकों के साथ एक बैठक की। बैठक में पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता भारत के टेक्सटाइल, चमड़ा और जूता उद्योगों के लिए एक बड़ा मौका है।समझौते से इन क्षेत्रों के लिए अवसरों की एक नई दुनिया खुलेगी। समझौते से टैरिफ कम होंगे, MSME को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार पैदा होंगे। यह समझौता भारतीय कारीगरों और निर्माताओं को वैश्विक पहचान दिलाएगा। आने वाले दिनों में मंत्रालय राज्यों में मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर तक पहुंचेगा और उन्हें इस समझौते से लाभ उठाने के लिए तैयार करेगा।











