यूएई की यह चेतावनी इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिका को डर सता रहा है कि यह युद्ध लेबनान या सीरिया तक भड़क सकता है जिससे खाड़ी देशों में फिर से लड़ाई शुरू हो सकती है। इस बीच फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान जारी करके चेतावनी दी है कि यह मौका किसी भी पक्ष के लिए इजरायल को धमकाने हेतु नहीं है। हमास के हमले का फायदा नहीं उठाया जाए। इससे पहले यूएई ने पिछले साल ही सीरिया के साथ अपने संबंधों को सामान्य किया था।
यूएई और सीरिया के बीच करीबी रिश्ते
यही नहीं यूएई ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद को अबूधाबी आमंत्रित भी किया था। यूएई का सीरिया पर अन्य अरब देशों की तुलना में सबसे ज्यादा प्रभाव है। इसी वजह से यूएई की चेतावनी को काफी अहम माना जा रहा है। इससे पहले साल 2020 में यूएई ने इजरायल के साथ भी अपने रिश्ते को पहली बार सामान्य किया था। दोनों के बीच एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुआ था। यूएई की सरकार ने सीरिया के अधिकारियों के एक शीर्ष दल को अपना यह संदेश दिया है।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यूएई ने सीरिया को दिए संदेश के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को भी जानकारी दी है। वहीं यूएई के एक अधिकारी ने कहा कि वह निजी राजनयिक बातचीत के बारे में कोई चर्चा नहीं करेंगे। सीरिया ने यूएई के चेतावनी पर कोई बयान नहीं दिया है। सीरिया ईरान का भी करीबी देश है जिस पर आरोप है कि उसने हमास को हथियारों की आपूर्ति की और रणनीति बनाने में भी मदद दी। हालांकि ईरान ने हमास के हमले में अपनी किसी भूमिका से इंकार किया है। इससे पहले यूएई ने हमास के हमले को उकसावे वाली कार्रवाई माना था।











