ललिता ने अपने टिफिन सर्विस का नाम 'घरची आठवण' यानी 'घर की यादें' इसलिए रखा, ताकि लोगों को घर जैसा सादा खाना मिल सके। एक साल तक तो सब कुछ ठीक रहा। लेकिन, जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि लोग उनके फलते-फूलते व्यवसाय के बावजूद उन्हें एक 'गृहिणी' के रूप में ही देखते हैं। ललिता एक उद्यमी के रूप में पहचान बनाना चाहती थीं। उनमें अपने व्यवसाय को बढ़ाने की बहुत ज्यादा इच्छा थी। लेकिन, ललिता की बचत सीमित थी। कोई भी उन्हें लोन देने को तैयार नहीं था।
2019 में ललिता ने ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज के स्टार्टअप कॉम्पिटिशन के बारे में एक अखबार में पढ़ा। इस प्रतियोगिता में जीतने वाले को 10 लाख रुपये का इनाम मिलना था। ललिता ने अपनी कहानी शेयर की और प्रतियोगिता जीत गईं। टैक्स कटने के बाद ललिता को 7 लाख रुपये मिले। इसे उन्होंने तुरंत अपने व्यवसाय में लगा दिया। उन्होंने 6 लाख रुपये रेस्टोरेंट में लगाए। बाकी पैसे रिजर्व फंड के तौर पर रखे।
इस पैसे से ललिता ने जुलाई 2019 में ठाणे कोपरी में अपना खुद का रेस्टोरेंट 'घरची आठवण' खोला। आज ललिता का बिजनेस घर का बना खाना, कैटरिंग और टिफिन सर्विस के जरिए हर महीने 6-7 लाख रुपये कमाता है। उनके बिजनेस का सालाना रेवेन्यू 1 करोड़ रुपये है। जैसे-जैसे उनका व्यवसाय बढ़ता गया, उनके पति ने भी गैस एजेंसी का काम छोड़ दिया और ललिता को पूरा सहयोग देने लगे। इस दंपति के पास अब दस फुल-टाइम कर्मचारी काम करते हैं। ललिता की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो घर से ही अपना बिजनेस शुरू करना चाहती हैं।











