सुमन बताती हैं कि घर में वह ज्यादातर समय खाली रहती थीं। ऐसे में उन्होंने सोचा कि इस खाली समय में कुछ बिजनेस किया जाए। साल 2018 में उन्होंने हरियाणा के मुरथल में HAIC मशरूम और कृषि विकास केंद्र से मशरूम की खेती की ट्रेनिंग ली। बटन मशरूम की खेती के बारे में सीखते समय उन्होंने कॉर्डिसेप्स मिलिटेरिस के बारे में भी सुना। यह हिमालय में पाया जाने वाला औषधीय गुणों वाला एक कवक है। इसे प्रयोगशाला में भी उगाया जा सकता है। इसे हिंदी में 'कीड़ा जड़ी' के नाम से जाना जाता है।
घर में शुरू की 'कीड़ा जड़ी' की खेती, सालाना 30 लाख रुपये पहुंची कमाई
नई दिल्ली: आपने घर में खेती करना सुना होगा। लेकिन क्या घर में जड़ी-बूटी उगाना सुना है? अगर सुना होगा तो काफी कम। दिल्ली की रहने वाली सुमन सुखीजा आज एक खास जड़ी-बूटी का बिजनस करके लाखों रुपये कमा रही हैं। सुमन कॉर्डिसेप्स मशरूम की खेती करती हैं। इसे हिंदी में 'कीड़ा जड़ी' के नाम से भी जानते हैं। कीड़ा जड़ी अपने औषधीय गुणों के लिए काफी फेमस है। सुमन इसकी खेती के अलावा लोगों को इसे उगाने की ट्रेनिंग भी देती हैं।
सुमन बताती हैं कि घर में वह ज्यादातर समय खाली रहती थीं। ऐसे में उन्होंने सोचा कि इस खाली समय में कुछ बिजनेस किया जाए। साल 2018 में उन्होंने हरियाणा के मुरथल में HAIC मशरूम और कृषि विकास केंद्र से मशरूम की खेती की ट्रेनिंग ली। बटन मशरूम की खेती के बारे में सीखते समय उन्होंने कॉर्डिसेप्स मिलिटेरिस के बारे में भी सुना। यह हिमालय में पाया जाने वाला औषधीय गुणों वाला एक कवक है। इसे प्रयोगशाला में भी उगाया जा सकता है। इसे हिंदी में 'कीड़ा जड़ी' के नाम से जाना जाता है।
ट्रेनिंग पूरी करने के बाद सुमन ने अपने घर के एक कमरे में एक लैब बनाई। वह कहती हैं कि साल 2018 में 200 वर्ग फीट में लैब बनाने में करीब 4 लाख रुपये का खर्च आया। उन्होंने थाईलैंड से कल्चर खरीदा। यह कल्चर कॉर्डिसेप्स उगाने का आधार या बीज है। यह ठोस होता है और 3 इंच की पेट्री डिश में आता है। सुमन अब इसे 93 हजार रुपये प्रति किलो की कीमत में बेचती हैं। इसे बेचकर वह करीब 30 लाख रुपये साल की कमाई कर रही हैं।
इस खेती को करने में ज्यादा मेहनत या समय की जरूरत नहीं पड़ती। सुमन बताती है कि इसकी शेल्फ लाइफ लंबी होती है और इन्हें ताजा बेचने का कोई दबाव नहीं होता। कॉर्डिसेप्स को एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर माना जाता है। साथ ही यह ऑटोइम्यून बीमारियों, सांस से संबंधी समस्याओं, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल कम करने, किडनी को हेल्दी रखने आदि में कारगर है।
सुमन हर महीने लगभग 20 से 30 लोगों को इसकी खेती की ट्रेनिंग देती हैं। साथ ही उनके लिए लैब स्थापित करने में मदद भी करती हैं। ट्रेनिंग के लिए प्रति व्यक्ति 15 हजार रुपये लेती हैं। सुमन बताती हैं कि जो भी शख्स कॉर्डिसेप्स की खेती करना चाहता है, उसके पास कम से कम 100 वर्ग फुट का स्पेस होना जरूरी है। इसमें शुरुआती निवेश करीब 3 लाख रुपये का होता है।
सुमन बताती हैं कि घर में वह ज्यादातर समय खाली रहती थीं। ऐसे में उन्होंने सोचा कि इस खाली समय में कुछ बिजनेस किया जाए। साल 2018 में उन्होंने हरियाणा के मुरथल में HAIC मशरूम और कृषि विकास केंद्र से मशरूम की खेती की ट्रेनिंग ली। बटन मशरूम की खेती के बारे में सीखते समय उन्होंने कॉर्डिसेप्स मिलिटेरिस के बारे में भी सुना। यह हिमालय में पाया जाने वाला औषधीय गुणों वाला एक कवक है। इसे प्रयोगशाला में भी उगाया जा सकता है। इसे हिंदी में 'कीड़ा जड़ी' के नाम से जाना जाता है।











