प्रॉपर्टी नाम करवा मां से बदसलूकी करने लगा बेटा, HC ने गिफ्ट डीड रद्द की, फिर संपत्ती से बेदखल कर सिखाया सबक

प्रॉपर्टी नाम करवा मां से बदसलूकी करने लगा बेटा, HC ने गिफ्ट डीड रद्द की, फिर संपत्ती से बेदखल कर सिखाया सबक
कृष्णा शुक्ला, मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए अपनी मां के साथ बदसलूकी करनेवाले बेटे को घर खाली करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा, मां घर की मालिक है। बेटे का घर पर कोई हक नहीं है। घटना और साक्ष्यों से पता चलता है कि मां और उसके बेटे के बीच प्यार और स्नेह नहीं है। बेटा भी अपनी बुजुर्ग मां की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में विफल रहा है। अप्रैल 2022 में सीनियर सिटिजन ट्रिब्यूनल ने गिफ्ट डीड रद्द करने के संबंध में जो फैसला दिया है, वह पूरी तरह से सही है। एक महिला ने अपने बेटे को दो 'गिफ्ट डीड' के तहत फ्लैट दिया था। वर्ष 2017 में महिला ने फ्लैट को उपहार में दे दिया था, लेकिन बेटा उसकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। उसने घर में 30 साल से रह रही अपनी बुजुर्ग मां को ही बेघर कर दिया। महिला ने सीनियर सिटिजन ट्रिब्यूनल से गिफ्ट डीड रद्द करने की मांग की थी।

अदालत ने क्या कहा

जस्टिस एसवी मारने ने मामले की सुनवाई के बाद कहा, मेनटिनेंस शब्द का मतलब सिर्फ पैसा देना नहीं है। इस शब्द में रोटी, कपड़ा, मकान और मेडिकल सेवा भी शामिल है। मां के पास नियमित आय आने का मतलब यह नहीं है कि उसे बुनियादी सुविधाओं की जरूरत नहीं है। प्रेम और स्नेह में भौतिक जरूरतों की शर्त अंतनिर्हित है। गिफ्ट डीड में शर्त का उल्लेख करने की जरूरत नहीं है। ट्रिब्यूनल ने अपने अधिकार के दायरे में गिफ्ट डीड को रद्द करने का आदेश दिया है। बेटे के आग्रह पर कोर्ट ने 6 सप्ताह तक घर को लेकर यथास्थिति कायम रखने को कहा है। बुजुर्ग महिला की ओर से ऐडवोकेट सिमिल पुरोहित ने पक्ष रखा।

ट्रिब्यूनल ने महिला के हक में दिया फैसला

बेटे के अत्याचार से तंग आकर 70 वर्षीय विधवा महिला ने ट्रिब्यूनल में शिकायत की थी। ट्रिब्यूनल ने शिकायत पर सुनवाई के बाद न सिर्फ गिफ्ट डीड को अमान्य घोषित कर दिया, बल्कि घर भी महिला के नाम पर बहाल कर दिया। ट्रिब्यूनल ने चेतावनी दी कि यदि बेटा ट्रिब्यूनल के आदेश की अवहेलना करेगा,तो उसकी मां के पास बेटे के खिलाफ जुहू पुलिस स्टेशन में शिकायत करने की छूट होगी। ट्रिब्यूनल के इस आदेश के खिलाफ बेटे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

बेटे का दावा

याचिका में बेटे ने दावा किया था कि गिफ्ट डीड में बुनियादी सुविधाएं देने व जरूरतों को पूरा करने की कोई शर्त नहीं थी। उसकी मां ने बड़े भाई के उकसाने पर इस डीड को रद्द किया है। ट्रिब्यूनल का आदेश सीनियर सिटीजन कानून के खिलाफ है। उसकी मां को भरण-पोषण की राशि की जरूरत नहीं है। उसने बंगले में मां की एंट्री को नहीं रोका है।
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