शुक्रवार को जब राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया, तो वहां पर बीजेपी नेताओं की मौजूदगी से तभी स्पष्ट हो गया था कि यह कदम सोच-समझकर लंबी रणनीति के तहत उठाया गया है।
बीजेपी में क्यों शामिल हुए राघव चड्ढा?
- अगले साल 2027 की शुरूआत में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और बीजेपी अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। चुनाव से पहले राघव चड्ढा, संदीप पाठक, हरभजन सिंह समेत आम आदमी पार्टी के इन राज्यसभा सांसदों को पार्टी में शामिल कराना बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है।
- सूत्रों के अनुसार, राघव चड्ढा और संदीप पाठक 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में AAP की जीत के प्रमुख सूत्रधार थे और दोनों कई महीनों से बीजेपी के संपर्क में थे। बीजेपी पंजाब में विभिन्न मतदाता समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए काम कर रही है और उसी के अनुसार, नेताओं को पार्टी में शामिल कर रही है।
पंजाब चुनाव को लेकर क्या है बीजेपी की रणनीति?
- बीजेपी पंजाब में पांथिक वोटों में भी सेंधमारी करने की कोशिश कर रही है, जिनपर कभी शिरोमणि अकाली दल का दबदबा हुआ करता था। अकाली दल के पतन के बाद बीजेपी नेताओं का मानना है कि यह वोट बैंक उनके हाथ में आ सकता है। क्योंकि यह कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों से निराश हैं।
- बीजेपी के इसी रणनीति के तहत अप्रैल की शुरूआत में सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील एचएस फूलका बीजेपी में शामिल हुए, जिससे पंथिक मतदाताओं के बीच बीजेपी की पहुंच मजबूत हुई। हालांकि राज्य अनुसूचित जातियों के बीच कांग्रेस की मजबूत पकड़ है लेकिन बीजेपी ने इसमें भी सेंधमारी शुरू कर दी है।
- फरवरी की शुरूआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत रविदास जयंती के अवसर पर जालंधर के डेरा सचखंड बल्लां का दौरा किया था। कुछ दिन पहले ही, डेरा प्रमुख संत निरंजन दास को पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। यह डेरा रविदासिया समुदाय का एक प्रमुख धार्मिक केंद्र है, जहां देशभर से अनुयायी आते हैं। ऐसे में बीजेपी लगातार अपनी पैठ मजबूत कर रही है। जिससे आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों के वोटरों में असर पड़ेगा।











