पृथ्वी से चंद्रमा पर बैक्टीरिया के पहुंचने का शक
उन्होंने कहा कि चंद्रमा पर माइक्रो बैक्टीरिया अगर हैं तो हो सकता है कि वे पृथ्वी पर पैदा हुए हों और किसी मून लैंडर पर सवार होकर वहां पहुंचे हों। हालांकि, यह अभी तक कल्पना ही है। सक्सेना ने कहा कि वह सौर मंडल के बाहर जीवन मौजूद होने के सबूतों का अध्ययन कर रहे हैं। हाल में ही वह एक ऐसी टीम के साथ काम कर रहे हैं, जिसकी नजर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर आज तक कोई भी पहुंच नहीं पाया है। यहां तक कि अभी तक किसी भी देश को इस इलाके में अपना अंतरिक्ष यान उतारने में भी सफलता नहीं मिली है।
हाल के वर्षों में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बहुत अधिक ध्यान दिया गया है क्योंकि नासा को 2025 में अपने आर्टेमिस III अंतरिक्ष यात्रियों को यहीं उतारने की उम्मीद है। नासा ने 13 संभावित लैंडिंग स्थलों की पहचान की है। उन्होंने कहा कि चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर आज तक किसी भी मनुष्य ने कदम नहीं रखा है। लेकिन, हम मून मिनरलॉजी मैपर से जानते हैं कि इसमें गड्ढों के अंदर बर्फ है, जिसे अंतरिक्ष यात्री रॉकेट ईंधन के लिए निकाल सकते हैं।इन गड्ढों के कुछ क्षेत्र स्थायी तौर पर अंधेरे में रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप, सूर्य का हानिकारक विकिरण इन चंद्र क्षेत्रों तक कभी नहीं पहुंचता है, और यह माइक्रो बैटक्टीरिया के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल हो सकता है।
चंद्रमा पर बैक्टीरिया की मौजूदगी का इसलिए है शक
हाल के वर्षों में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बहुत अधिक ध्यान दिया गया है क्योंकि नासा को 2025 में अपने आर्टेमिस III अंतरिक्ष यात्रियों को यहीं उतारने की उम्मीद है। नासा ने 13 संभावित लैंडिंग स्थलों की पहचान की है। उन्होंने कहा कि चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर आज तक किसी भी मनुष्य ने कदम नहीं रखा है। लेकिन, हम मून मिनरलॉजी मैपर से जानते हैं कि इसमें गड्ढों के अंदर बर्फ है, जिसे अंतरिक्ष यात्री रॉकेट ईंधन के लिए निकाल सकते हैं।इन गड्ढों के कुछ क्षेत्र स्थायी तौर पर अंधेरे में रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप, सूर्य का हानिकारक विकिरण इन चंद्र क्षेत्रों तक कभी नहीं पहुंचता है, और यह माइक्रो बैटक्टीरिया के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल हो सकता है।











