फर्श पर बैठकर इंतजार करती रहीं गर्भवती महिलाएं, 15-15 दिन की वेटिंग

फर्श पर बैठकर इंतजार करती रहीं गर्भवती महिलाएं, 15-15 दिन की वेटिंग

जिला अस्पताल में सोनोग्राफी करवाने आ रहीं गर्भवती महिलाओं और भर्ती मरीजों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। सोनोग्राफी कराने के लिए मरीजों को 15-15 दिनों तक लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। गुरुवार को अस्पताल के सोनोग्राफी कक्ष के बाहर मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अव्यवस्था का आलम यह रहा कि अपनी बारी के इंतजार में गर्भवती महिलाएं फर्श पर बैठने को मजबूर नजर आईं।

असल में संविदा चिकित्सक डॉ.आस्था अग्रवाल शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पदस्थ हैं जिनकी सेवाएं जिला अस्पताल की बिगड़ती व्यवस्था को देखते हुए सोनोग्राफी में ली जा रही थी, लेकिन विगत दिनों सीएमएचओ ने उनको उनकी मूल संस्था भेज दिया। हालांकि व्यवस्था संभालने के लिए उनकी ड्यूटी जिला अस्पताल में केवल मंगलवार और गुरुवार को तय की है।

सप्ताह में केवल दो दिन सोनोग्राफी होने के कारण अस्पताल में मरीजों का भारी दबाव बन रहा है। गुरुवार को सोनोग्राफी के लिए करीब 60 मरीजों का पंजीयन हुआ। सुबह से ही कक्ष के बाहर महिलाओं की लंबी लाइन लग गई। सीमित समय होने के कारण डॉक्टर सभी मरीजों की जांच नहीं कर सकीं, जिससे कई गर्भवती महिलाओं को बिना जांच कराए बैरंग लौटना पड़ा। उन्हें अब अगले मंगलवार को दोबारा आने की सलाह दी गई है। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ.बीएल टैगोर ने बताया कि ये बात सही है कि डॉ.अग्रवाल के जाने के बाद अव्यवस्था हुई है हालांकि हम जैसे तैसे व्यवस्था बना रहे हैं। सीएमएचओ मेडम को भी इस समस्या से अवगत करा दिया है। सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी न होने का फायदा निजी रेडियोलॉजी सेंटर उठा रहे हैं। जिला अस्पताल में जहां जांच नि:शुल्क होती है, वहीं बाहर मरीजों को करीब 800 से 1200 रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं, जो गरीब परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ है।

सोनोग्राफी करवाने आई जमीन पर बैठी गर्भवती महिला की सास सुनीता बाई ने बताया कि हम 20 किमी दूर से सुबह 10 बजे आ गए थे। बहू के पेट में दर्द है, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा है कि जमीन पर बैठाना पड़ा। 12 बजे बताया कि मंगलवार को आना पड़ेगा।

बार-बार आने-जाने में 1500 रुपए तक की चपत एक बार आने में किराए-भाड़े और खाने-पीने का 300 से 500 रुपए का खर्च आता है। अगर महिला को बिना जांच कराए 2-3 बार लौटना पड़े तो 1500 रुपए तक केवल चक्कर काटने में बर्बाद हो जाते हैं।

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