कागजों में स्मार्ट क्लास और सर्व शिक्षा अभियान के बड़े-बड़े दावों के बीच सागर जिले के सरकारी स्कूलों की मैदानी हकीकत चौंकाने वाली है। रोंड़ा हायर सेकंडरी स्कूल और नाऊढाना हाईस्कूल में बच्चों की शिक्षा पूरी तरह जुगाड़ के भरोसे चल रही है। स्थिति यह है कि रोंड़ा में चार कक्षाओं के लिए सिर्फ 3 कमरे हैं, जहां एक कमरे में बीचों-बीच नेट (जाली) बांधकर 9वीं और 11वीं के छात्रों को एक-दूसरे तरफ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।
वहीं नाऊढाना में मुख्य स्कूल भवन जर्जर होने के कारण एकीकृत हाई स्कूल (6वीं से 10वीं) का संचालन दो अलग-अलग भवनों में हो रहा है। कक्षा-6वीं की पढ़ाई 100 मीटर दूर प्राइमरी स्कूल में होती है। जबकि 7वीं से 10वीं तक के बच्चों को आंगनबाड़ी भवन में बैठकर पढ़ाया जा रहा है। इसमें भी हालात ऐसे बनते हैं कि जिस दिन जिस क्लास में ज्यादा बच्चे आते हैं, उन्हें ही आंगनबाड़ी का मुख्य हॉल नसीब होता है। अन्य कक्षाओं के विद्यार्थियों को अन्य छोटे कक्षों से लेकर गैलरी तक में बैठाया जाता है।
यहां नया भवन बन रहा है, जो जनवरी-फरवरी 2026 में बनाने का आश्वासन दिया गया था परंतु अभी स्थिति यह है कि सिर्फ पिलर ही खड़े हो सके हैं। स्कूलों में जमीनी मॉनीटरिंग ठप होने के कारण ऐसी स्थिति बनी है। इससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जिसका असर रिजल्ट पर पड़ेगा।
तीन माह से जनशिक्षक नहीं, इसलिए भी मॉनीटरिंग शून्य, नई नियुक्तियां अटकीं
सागर में स्कूलों का स्तर गिरने की एक बड़ी वजह जनशिक्षकों की कमी है। शासन के निर्देशानुसार 21 विद्यालयों पर 1 जनशिक्षक तैनात किया जाना है, ताकि प्रत्येक स्कूल का नियमित अकादमिक और प्रशासनिक सुपरविजन हो सके। वर्तमान में निगरानी तंत्र पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। इसकी वजह है कि 10 जुलाई को 50 जनशिक्षक हटाए गए थे, उनकी जगह दूसरों की नियुक्ति अब तक नहीं की जा सकी है। लेकिन नए समन्वयकों की पदस्थापना न होने से स्कूलों में निरीक्षण नहीं हो रहा है। सागर में 122 जनशिक्षकों और 55 बीएसी की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है। राज्य शिक्षा केंद्र के आदेश पर 20 अगस्त तक नियुक्ति पूरी हो जाना थी लेकिन अब तक काउंसिलिंग ही नहीं हो सकी है। ऐसे में विद्यालयों की मैदानी समीक्षा ठप हो गई है।
प्राचार्य बोले- पढ़ाई पर पूरा फोकस, बच्चों को बैठाने के बेहतर इंतजाम कर रहे हैं रोंड़ा हायर सेकंडरी स्कूल के प्राचार्य रामचरण जाटव का कहना है कि परिसर में कुल 3 कमरे हैं, जबकि कक्षाएं चार हैं। ऐसे में नेट लगाकर 9वीं और 11वीं के विद्यार्थियों को कक्ष के अलग-अलग हिस्सों में बैठाते हैं। कभी दालान-गैलरी में भी बैठा देते हैं। 5 कक्ष स्वीकृत हो गए हैं। निर्माण होना है। वहीं नाऊढाना हाई स्कूल के प्राचार्य नवल किशोर सोनी का कहना है कि जो हमारा भवन है, वह जर्जर है। ऐसे में 6वीं की कक्षा प्राइमरी में लगाते हैं। जबकि 7वीं से 10वीं तक की कक्षाएं आंगनबाड़ी भवन में संचालित करते हैं। एक बड़ा हॉल और अन्य कमरे हैं। जिस दिन जिस कक्षा में ज्यादा विद्यार्थी रहते हैं उन्हें हॉल में बैठाते हैं। जबकि अन्य कक्षों और गैलरी में भी विद्यार्थी बैठाते हैं। विद्यार्थियों की जैसी संख्या होती है वैसा बदलाव हम कर लेते हैं। दोनों ने कहा कि हमारी प्राथमिकता बेहतर शिक्षा देना है।
जिले के अफसर मीटिंग और सेवा संकल्प में लगे, निरीक्षण नहीं सागर में जेडी स्कूल शिक्षा से लेकर डीईओ और डीपीसी कार्यालय है। यहां कई अफसर पदस्थ हैं। परंतु स्कूलों की जमीनी हालत क्या है? यह रोंड़ा और नाऊढाना स्कूलों से ही पता लगता है। अफसर मीटिंग और वीसी के नाम पर मुख्यालय में ही नजर आते हैं। टीएल, जनसुनवाई, हाईकोर्ट में केस, भोपाल बैठक, मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान जैसे कामों के नाम पर जिला स्तर से स्कूलों में औचक निरीक्षण लगातार कम होते जा रहे हैं। वर्तमान में सेवा संकल्प अभियान चल रहा है, जिसमें पूरा फोकस इस बार स्कूलों पर ही है। ऐसे में नेताओं को खुश करने, बच्चों की भीड़ जुटाने जैसे कामों में जिम्मेदार लगे हुए हैं।
जहां निर्माण में देरी वहां विशेष मॉनीटरिंग कर रहे : डीईओ जहां स्कूल जर्जर हैं, वहां वैकल्पिक व्यवस्था अन्य भवनों मे की गई है। अतिरिक्त कक्ष, नए भवन भी बन रहे हैं। जो स्कूल उन्नयन हुए हैं, वहां अतिरिक्त कक्ष, नए भवन स्वीकृत हो गए हैं। कई जगह बन भी रहे हैं। जहां देरी की जा रही है, उन्हें जल्दी व गुणवत्तापूर्ण बनाने विशेष मॉनीटरिंग कर रहे हैं। स्कूलों का लगातार निरीक्षण भी किया जा रहा है। - अरविंद जैन, डीईओ, सागर
