सागर जिले के बंडा में 36 लोगों की जान लेने वाले जहरीली शराब कांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपियों को शराब के जहरीली और अमानक होने की जानकारी वारदात से पहले ही लग चुकी थी। इसके बावजूद उन्होंने न तो शराब की सप्लाई रोकी और न ही प्रशासन को सूचित किया।
जेल से मिले एक गोपनीय इनपुट के बाद शुरू हुई जांच में पुलिस ने अब तक 52 आरोपियों को नामजद किया है, जिनमें से 36 को गिरफ्तार किया जा चुका है।
साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अब आरोपियों के खिलाफ हत्या (धारा 302) का मामला दर्ज करने की तैयारी कर रही है।
जेल के इनपुट से खुला शराब बनाने का राज
घटना के बाद पुलिस आरोपी चंद्रभान सिंह राजपूत उर्फ चंदू राजा को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही थी, लेकिन वह जानकारी छिपा रहा था। इसी बीच पुलिस को सागर सेंट्रल जेल से एक अहम इनपुट मिला।
दरअसल, अगस्त महीने में जेल में बंद शिवांजय सिंह राजपूत ने अपने साथी से कहा था कि उसके पास शराब बनाने का विशेष 'फॉर्मूला' है।
पुलिस ने जब शिवांजय की कॉल डिटेल और लोकेशन खंगाली तो उसका कनेक्शन चंद्रभान से निकला। इस एक सुराग ने पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क की परतें उघाड़ दीं।
दिल्ली से केमिकल, ग्वालियर से रैपर और मुरैना से आई टीम
जांच में सामने आया कि जहरीली शराब तैयार करने के लिए मजबूत और संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
- दिल्ली से केमिकल: दिल्ली की 'आरएन केमिकल' फर्म से 5 ड्रम औद्योगिक स्प्रिट और थिनर मंगाया गया था। शिवांजय खुद फर्जी ट्रांसपोर्ट बिल्टी के जरिए किराए की पिकअप से इसे ततरवारा लाया था।
- मुरैना का कनेक्शन: मुख्य आरोपी रवि लखेरा (जिसे एनकाउंटर में पकड़ा गया) ने मुरैना के दिनेश शिवहरे और उसकी टीम को शराब बनाने के लिए बंडा बुलाया।
- ग्वालियर से रैपर और बोतलें: नकली रैपर ग्वालियर से कोरियर से मंगाए गए, जबकि बोतलें, ढक्कन और कार्टन ट्रांसपोर्ट तथा निजी वाहनों से चंद्रभान के घर पहुंचाए गए।
लाइसेंसी दुकानों की आड़ में गांवों तक बिछाया जाल
जांच के अनुसार, आरोपियों ने अवैध कारोबार को कानूनी ढाल देने के लिए लाइसेंसी शराब ठेकेदारों से पार्टनरशिप कर रखी थी।
चंद्रभान ने लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा और मनीष लोधी के साथ मिलकर बरेठी मदिरा दुकान में अघोषित हिस्सेदारी की।
3 सितंबर को चंद्रभान के घर शराब तैयार की गई और लाइसेंसी दुकान की आड़ में इसे नौराज, गूगरा, छापरी, जगथर समेत आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांवों के एजेंटों तक पहुंचा दिया गया।
शराब चखते ही बिगड़ी तबीयत, फिर भी बेची मौत
4 सितंबर को शराब तैयार होने के बाद इसे दिनेश शिवहरे और देवा जाटव ने चखा। इसके तुरंत बाद दोनों की तबीयत बिगड़ने लगी।
5 सितंबर को जब दिनेश की हालत गंभीर हुई तो आरोपियों को साफ समझ आ गया था कि शराब बेहद अमानक और जहरीली है, लेकिन नुकसान से बचने के लिए उन्होंने सप्लाई रोकने या लोगों को सचेत करने के बजाय जहरीली शराब की बिक्री जारी रखी।
दिनेश को बंसल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से चंद्रभान उसे अपनी जिम्मेदारी पर डिस्चार्ज कराकर मुरैना ले जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
दिनेश की मौत को परिजन से 'हार्ट अटैक' बताकर छिपाने की कोशिश की गई, लेकिन अस्पताल के CCTV में चंद्रभान की मौजूदगी ने साजिश का भंडाफोड़ कर दिया।
शराब चखने वाले दूसरे साथी देवा जाटव की आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई।
फिलहाल, पुलिस CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड्स और टेक्निकल साक्ष्यों को जोड़कर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य फरार आरोपियों की धरपकड़ में जुटी है।
