अनवार उल-हक काकड ने गुरुवार को एक्स पर लिखा, 'पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जिसकी सभ्यता और संस्कृति की जड़ें नौ हजार साल से ज्यादा पुरानी हैं। इनमें मेहरगढ़ (करीब 7000–2500 ईसा पूर्व), रहमान ढेरी (करीब 4000–3300 ईसा पूर्व), हड़प्पा (3300 ईसा पूर्व से) और मोहनजोदाड़ो (तकरीबन 2500–1900 ईसा पूर्व) पुरानी है।'
दावा कर घिरे काकड
अनवार काकड ने अपनी इस लिस्ट में गिलगित-बाल्टिस्तान को भी जोड़ा, जहां 50,000 से ज्यादा पेट्रोग्लिफ (पत्थर पर बनी आकृतिया) और 5,000 शिलालेख मिले हैं। ये शिलालेख प्रागैतिहासिक काल (लगभग 5000–1000 ईसा पूर्व) से लेकर ऐतिहासिक काल तक के हैं।अगस्त 2023 से मार्च 2024 तक पाकिस्तान के कार्यवाहक (केयरटेकर) प्रधानमंत्री के रूप में काम कर चुके काकड ने ये भी लिखा कि 14 अगस्त 1947 को इस प्राचीन राष्ट्र का राजनीतिक पुनर्जन्म हुआ। यह ट्वीट कुछ ही घंटे में सोशल यूजर्स के निशाने पर आ गया और वायरल हो गया।
सोशल यूजर्स ने क्या-क्या कहा
अनवार काकड के ट्वीट क जवाब में सोशल यूजर्स ने कहा है कि पाकिस्तान का उदय 1947 में ब्रिटिश भारत के विभाजन के तौर पर हुआ। ऐसे में पाकिस्तान का भारतीय उपमहाद्वीप की पुरानी सभ्यता और पहचान पर दावा हास्यास्पद है। जानें सोशल यूजर्स ने क्या-क्या कहा है।- पाकिस्तान की कोई जड़ें नहीं हैं। वह असल में भारत या भारतीय राज्यों का ही हिस्सा है। आपकी समस्या वर्तमान है, अतीत नहीं- प्राउड थमीजन
- बताई गई सभी समय-सीमाएं और ऐतिहासिक खोजें सनातन/हिंदू धर्म से जुड़ी हैं। आपकी बातों का का पाकिस्तानी से संबंध नहीं है- रोहित
- पाकिस्तान हिंदू संस्कृति को खत्म करने की गंभीर कोशिशें कर रहा है, लेकिन उसे सीमित सफलता ही मिली है। अब वह पलट रहा है- राकेश
- पाकिस्तानी वास्तुकला ईरान और मध्य पूर्व की नकल है। दावत के दौरान आपके खाने का तरीका अरबों जैसा होता जा रहा है- केलेस्टल
- पाकिस्तान जोड़-तोड़ से बना देश है, जिसका ना कोई इतिहास और ना ही कोई भविष्य है। देश की सिर्फ बनावटी पहचान है- सरकास्टिक भाई
- काकड़ ने जिन पुरानी संस्कृतियों का जिक्र किया है, सच में वह भारतीय सभ्यता है। पाकिस्तान का हिंदू सभ्यता पर दावा अजीब है- हार्दिक यादव
- वे 9,000 साल पुरानी जगहें प्राचीन भारतीय उपमहाद्वीप की सिंधु/हड़प्पा सभ्यता की हैं, ना कि 1947 में बने पाकिस्तान की हैं- मिस्टर बस्टर
- 1947 से पहले पाकिस्तान नाम की कोई चीज नहीं थी। सब कुछ भारत ही था। आप अपनी जड़ों को अपनाने के लिए आजाद हैं- अनिल नियोगी
