बयान में कहा गया है कि एक आंतरिक जांच में पाया गया कि दौरे के आयोजन में ऑपरेशनल कमियों और खामियों के कारण महिला कर्मचारियों को अस्वीकार्य तरीके से हटाया गया था। ये विवाद इसमहीने की शुरुआत में तब हुआ, जब बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) समूह से जुड़े 100 लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल एफिल टॉवर पहुंचा। इस दौरान महिलाओं की जगह पुरुष सहयोगियों को तैनात किया गया था।
SETE ने क्या कहा
SETE ने इससे पहले कहा था कि प्रतिनिधिमंडल ने अनुरोध किया था कि दौरे का आयोजन इस तरह किया जाए कि महिलाओं के साथ बातचीत सीमित रहे। हम मानते हैं कि इन शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था स्टाफ यूनियन के एक प्रतिनिधि ने कहा कि महिलाओं को अपनी काम की जगह छोड़ने के लिए कहा गया और उन्हें अपमानित महसूस हुआ।स्मारक के कर्मचारियों ने बताया कि महिला कर्मचारियों को यह भी निर्देश दिया गया था कि प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी के दौरान वे कुछ खास इलाकों से ना गुजरें। इस दौरे के कारण टॉवर को बंद करना पड़ा क्योंकि कर्मचारियों ने अपना विरोध जताने के लिए हड़ताल कर दी और राजनेताओं ने इस घटना की निंदा की।
जेंडर इक्वालिटी (लैंगिक समानता) को बढ़ावा देने वाले उपाय और ट्रेनिंग प्रोग्राम लागू करने का अनुरोध किया है। आने वाले महीनों में हम सबसे अच्छे हालात में लीडरशिप में बदलाव की तैयारी कर सकेंगे।
फ्रांस में दिखा विरोध
फ्रांस की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष याएल ब्रॉन-पिवेट ने दौरे के बाद कहा था कि मैं विदेशी आगंतुकों की मांगों को पूरा करने के लिए महिलाओं को किनारे हटने के लिए मजबूर किए जाने की इजाजत नहीं दूंगी। पेरिस के सोशलिस्ट मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने इसे बेतुका, अनुचित और अस्वीकार्य फैसला बताया और दो अलग-अलग जांच के आदेश दिए।BAPS ने इस महीने की शुरुआत में हुई किसी भी परेशानी के लिए माफी मांगते हुए कहा था कि हम आपसी सम्मान और सेवा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों में विश्वास करते हैं। अपनी वेबसाइट पर BAPS खुद को हिंदू मूल्यों के जरिए समाज को बेहतर बनाने के लिए समर्पित एक आध्यात्मिक और स्वयंसेवकों से संचालित संगठन बताता है।
