स्टैंडबाय समझौते को मंजूरी मिलना बाकी
आईएमएफ ने पाकिस्तान के साथ तीन अरब डॉलर का एक स्टाफ लेवल एग्रीमेंट किया है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक आईएमएफ की तरफ से गुरुवार को इस स्टैंडबाय समझौते की जानकारी दी गई है। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान जो डिफॉल्ट होने की कगार पर है, यह फैसला उसके लिए बड़ी राहत लेकर आएगा। हालांकि अभी तक आईएमएफ की तरफ से इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है।
बताया जा रहा है कि इस डील को आईएमएफ बोर्ड की तरफ से मंजूरी मिलनी बाकी है। आठ महीने की देरी के बाद यह फैसला पाकिस्तान को राहत दे सकता है। देश इस समय गंभीर भुगतान संतुलन संकट और गिरते विदेशी मुद्रा भंडार से जूझ रहा है। आईएमएफ के अधिकारी नाथन पोर्टर ने कहा, 'नया स्टैंडबाय समझौता पाकिस्तान के 2019 विस्तारित फंड सुविधा-समर्थित कार्यक्रम पर आधारित है जो जून के अंत में खत्म हो रहा है।'
सिर्फ मिली एक अरब डॉलर की मदद
पाकिस्तान को आईएमएफ की तरफ से चार तिमाही और चार अर्ध-वार्षिक समीक्षाओं के साथ किश्त में ऋण मिलना है। यह कर्ज देश में आर्थिक सुधारों को गति देने के लिए जरूरी आईएमएफ के मानकों से जुड़ा था। दो अक्टूबर, 2022 की समय सीमा के साथ, विस्तारित निधि सुविधा (ईएफएफ) के तहत पाकिस्तान के लिए करीब 6 बिलियन डॉलर के कर्ज की मंजूरी मिली थी। बाद में यह समय सीमा 30 जून तक के लिए बढ़ा दी गई थी। आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने एक कर्ज राशि को मंजूरी दी थी। यह राशि पाकिस्तान की ऋण निकासी क्षमता का 210 फीसदी थी। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि चरणबद्ध तरीके से उसे यह कर्ज मिल जाएगा। साथ ही बाकी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी उसे 38 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि मिलने की उम्मीद थी। मगर तुरंत राहत के तौर पर सिर्फ एक अरब डॉलर की ही मदद मिल सकी है।
सिर्फ मिली एक अरब डॉलर की मदद
पाकिस्तान को आईएमएफ की तरफ से चार तिमाही और चार अर्ध-वार्षिक समीक्षाओं के साथ किश्त में ऋण मिलना है। यह कर्ज देश में आर्थिक सुधारों को गति देने के लिए जरूरी आईएमएफ के मानकों से जुड़ा था। दो अक्टूबर, 2022 की समय सीमा के साथ, विस्तारित निधि सुविधा (ईएफएफ) के तहत पाकिस्तान के लिए करीब 6 बिलियन डॉलर के कर्ज की मंजूरी मिली थी। बाद में यह समय सीमा 30 जून तक के लिए बढ़ा दी गई थी। आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने एक कर्ज राशि को मंजूरी दी थी। यह राशि पाकिस्तान की ऋण निकासी क्षमता का 210 फीसदी थी। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि चरणबद्ध तरीके से उसे यह कर्ज मिल जाएगा। साथ ही बाकी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी उसे 38 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि मिलने की उम्मीद थी। मगर तुरंत राहत के तौर पर सिर्फ एक अरब डॉलर की ही मदद मिल सकी है।
आईएमएफ की तरफ से बार-बार पाकिस्तान से रक्षा बजट में कटौती की मांग की गई है। अगस्त 2022 तक, पाकिस्तान को ऋण की किश्तें मिल रही थीं क्योंकि वह आईएमएफ द्वारा स्थापित मानदंडों को पूरा कर सकता था। लेकिन कोविड से जूझती पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था ढह गई और फिर यूक्रेन युद्ध के साथ-साथ इमरान खान के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद राजनीतिक संकट पैदा हो गया। अपनी आंतरिक स्थितियों के कारण पाकिस्तान, आईएमएफ की शर्तों पर कार्रवाई करने में फेल रहा। इसकी वजह से नौवीं रिव्यू मीटिंग और उससे जुड़ी 1.1 बिलियन डॉलर की किस्त में देरी हो गई। यह रिव्यू मीटिंग नवंबर 2022 से ही अटक है। साथ ही आईएमएफ कैलेंडर में इस महीने के लिए कोई पाकिस्तान एजेंडा नहीं है।











