बड़ा तालाब में अतिक्रमणों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बुधवार को राज्य शासन और स्थानीय प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। एनजीटी ने कहा कि मामला 2020 से लंबित है, पर छह साल में अधिकारी वेटलैंड की वास्तविक सीमा तय नहीं कर सके।
एनजीटी ने कहा कि इससे आशंका पैदा होती है कि प्रतिबंधित वेटलैंड क्षेत्र में हुए कुछ अवैध निर्माणों को संरक्षण दिया जा रहा है। आखिर अधिकारी किसे बचाना चाहते हैं? राशिद नूर खान बनाम कलेक्टर भोपाल एवं अन्य मामले में आवेदक की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने कहा कि छोटे अतिक्रमण हटाए गए, पर बड़े और प्रभावशाली अतिक्रमणों पर कार्रवाई नहीं हुई।
एनजीटी ने नगर निगम और कलेक्टर को एफटीएल और बफर जोन में सभी अतिक्रमण हटाने व 29 जुलाई से पहले प्रगति रिपोर्ट पेश को कहा।
निगम ने स्वीकार किया कि वेटलैंड पर अतिक्रमण हैं...
भोपाल नगर निगम ने स्वीकार किया कि वेटलैंड, निजी और कुछ शासकीय भूमि पर अतिक्रमण हैं। कुछ मामलों में हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश भी लागू हैं। जस्टिस एसके सिंह और डॉ. सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेशों का सम्मान जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर अवैध निर्माण जारी नहीं रह सकते।











