हिंडनबर्ग रिसर्च की 24 जनवरी 2023 को आई रिपोर्ट ने अडाणी ग्रुप को हिलाकर रख दिया था। रिपोर्ट में अडाणी ग्रुप पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। रिपोर्ट के एक साल बाद अब अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को एक लेटर लिखा है। इसमें उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने कंपनी को अहम सबक सिखाया है।
अडाणी ने लिखा कि हमारे खिलाफ झूठ और बेबुनियाद आरोप कोई नई बात नहीं थी। इसलिए विस्तार से जवाब जारी करने के बाद मैंने इसके बारे में और कुछ नहीं सोचा। अडाणी ने ये भी कहा कि हमारी कंपनियों के प्रदर्शन से पता चलता है कि आरोप निराधार थे।
गौतम अडाणी के लेटर की 5 खास बातें
मीडिया में कुछ लोगों की मदद से हमारे खिलाफ ये झूठ इतने तीखे थे कि हमारे पोर्टफोलियो के मार्केट कैप में काफी कमी आई। मुझे इस बात की ज्यादा परेशानी थी कि हजारों छोटे निवेशकों ने अपनी बचत खो दी। हमारे विरोधियों की योजना अगर पूरी तरह से सफल हो जाती तो इससे बड़ी समस्या हो सकती थी।
इस संकट से निपटने के लिए कोई रोडमैप नहीं था। अपने कारोबार पर विश्वास ने हमें अलग राह अपनाने की हिम्मत दी। सबसे पहले तो हमने 20,000 करोड़ रुपए का FPO लाने के बाद, उस रकम को वापस लौटाने का फैसला लिया। यह कॉर्पोरेट इतिहास में नया कदम था, जो दिखाता है कि हम निवेशकों के हित और नैतिक कारोबार को लेकर कितने गंभीर हैं।
हमने तथ्यों को पारदर्शी ढंग से रखा और कहानी का अपना पक्ष बताने पर ध्यान दिया। इससे हमारे ग्रुप के खिलाफ चलाए जा रहे निगेटिव कैंपेन का प्रभाव कम हो गया।
पिछले साल की कठिनाइयों ने हमें महत्वपूर्ण सबक सिखाया, मजबूत बनाया। हालांकि, हम पर यह हमला और हमारे मजबूत जवाबी कदम निस्संदेह एक केस स्टडी बनेंगे। मुझे अपनी सीख साझा करने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि, आज हम थे, कल कोई और हो सकता है।
मैं इस भ्रम में नहीं हूं कि यह ऐसे हमलों का अंत है। मेरा मानना है कि हम इस अनुभव से और ज्यादा मजबूत होकर उभरे हैं और भारत की विकास गाथा में अपना विनम्र योगदान जारी रखने के अपने संकल्प में और अधिक दृढ़ हैं।
सेबी कर रहा मामले की जांच
24 जनवरी 2023 को हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडाणी ग्रुप पर मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर शेयर मैनिपुलेशन जैसे आरोप लगाए थे। केस की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 6 सदस्यीय कमेटी बनाई थी। इसके अलावा मार्केट रेगुलेटर SEBI को भी जांच करने के लिए कहा था।
SEBI जांच में अब तक क्या-क्या हुआ?
2 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक कमेटी बनाई थी और SEBI को भी जांच के लिए 2 महीने का समय दिया था।
SEBI को 2 मई तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन SEBI ने सुनवाई के दौरान जांच के लिए 6 महीने की मोहलत मांगी।
बेंच ने इसे अगस्त तक बढ़ा दिया। यानी SEBI को अपनी जांच कर रिपोर्ट सौंपने के लिए कुल 5 महीने का समय मिला।
14 अगस्त को SEBI ने अपनी जांच पूरी करने और रिपोर्ट सौंपने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 15 दिन का समय और मांगा।
25 अगस्त को SEBI ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट फाइल की। बताया कि 22 जांच फाइनल हो चुकी हैं और 2 अधूरी हैं।
24 नवंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। कहा था कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को सही मानने की जरूरत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने 3 जनवरी को सेबी को बचे हुए 2 मामलों की जांच के लिए 3 और महीने का समय दिया है। सेबी ने 24 में से 22 मामलों की जांच पूरी कर ली है।











