कभी उड़ता था मजाक
जब विजय शेखर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने दिल्ली आए तो उन्हें हिंदी और इंग्लिश के बीच का बहुत बड़ा अंतर पता चला। हिंदी मीडियम से पढ़े विजय शेखर शर्मा की इंग्लिश उस समय अच्छी नहीं थी। इसके चलते साथ पढ़ने वाले इंग्लिश मीडियम के छात्र कई बार मज़ाक भी उड़ाते थे। हालांकि उन्हें कुछ ऐसे साथी भी मिले जिन्होंने इंग्लिश सीखने में उनकी मदद की। इंग्लिश को लेकर बहुत परेशानियां सामने आईं विजय के, वह फेल भी हुए, लेकिन उन्होंने ये मन बना लिया कि वह इसे सीख के ही दम लेंगे। ये उनकी इच्छाशक्ति ही थी जिसके दम पर उन्होंने जल्द ही इंग्लिश भाषा सीख ली।
ऐसे हुई पेटीएम की शुरुआत
वियज शेखर शर्मा ने साल 1997 में अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही indiasite.net नाम की एक वेबसाइट बनाई थी। इसके बाद उन्होंने इसे लाखों रुपये में बेचा था। इसके बाद साल 2000 में उन्होंने one97 communication ltd की स्थापना की। इसपर जोक्स, रिंगटोन, परीक्षा के रिजल्ट और क्रिकेट मैच का स्कोर दिखाया जाता था। यही वन97 पेटीएम की पैरेंट कंपनी है। विजय शेखर ने साल 2010 में पेटीएम की शुरुआत साउथ दिल्ली के एक किराए के कमरे से की थी। इसके बाद विजय शेखर शर्मा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह लगातार सफलता की ऊंचाइयों को छूते चले गए।
ऐसे आया बिजनेस का आइडिया
विजय जब दिल्ली में रहते थे तब वह छुट्टी वाले दिन बाजारों में घूम कर फॉर्च्यून और फोर्ब्स जैसी मैगजीन्स की पुरानी कॉपियां खरीदा करते थे। इस दौरान किसी पुरानी मैग्जीन में उन्होंने एक बिजनेस मैन की सक्सेस स्टोरी पढ़ी। स्टोरी में बताया गया था कि कैसे अमेरिका के सिलिकॉन वैली में रहने वाले शख्स ने अपने गैराज से एक कंपनी शुरू की और उसे कामयाब बनाया। इस स्टोरी का विजय शेखर पर काफी असर हुआ और उन्होंने भी बिजनेस करने की ठान ली।











