कई सदस्य देश पहले से ही भारत को संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं और भारत भी सप्लाई चेन में कुछ कंपोनेंट दे रहा है। लेकिन हां, यह निश्चित रूप से एक रुकावट है। उन्होंने आगे कहा कि दोनों पक्ष एक भारत-EU रक्षा उद्योग मंच बनाने पर विचार कर रहे हैं, जहां उद्योग जगत के लोग सप्लाई चेन में तालमेल की संभावनाओं को तलाश सकें, जिससे शायद संयुक्त निर्माण (जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग) का रास्ता खुल सके।
राजदूत पैकेट ने पीएम मोदी की तारीफ भी की
इसी क्रम में जीन-एरिक पैकेट ने रूस-यूक्रेन के "कभी न खत्म होने वाले" युद्ध को समाप्त करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दिए गए संदेश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दोहराए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि इससे रूस को युद्धविराम के लिए बातचीत की मेज पर लाने में मदद मिलेगी।EU भारत के साथ FTA के साथ-साथ निवेश पर भी बात कर रहा
TOI को दिए एक खास इंटरव्यू में, राजदूत ने यह भी कहा कि EU, FTA के साथ-साथ भारत के साथ निवेश सुरक्षा समझौते पर बातचीत कर रहा है, जिसके 2027 की पहली छमाही में लागू होने की उम्मीद है। साथ ही, वे इस बात पर भी चर्चा कर रहे हैं कि क्या भारत में कार्बन की कीमत को उनके कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) में शामिल किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने FTA पर साइन करने के लिए दिसंबर में मोदी के ब्रुसेल्स दौरे की पुष्टि नहीं की, लेकिन पैकेट ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो यह समझौते को पूरा करने का एक शानदार तरीका होगा।EU के प्रतिबंधों ने भारत को रूसी ऊर्जा खरीदने से नहीं रोक सका
पैकेट ने कहा कि EU के प्रतिबंधों ने भारत को रूसी ऊर्जा खरीदने से नहीं रोका। हालांकि, रूसी तेल से बने पेट्रोलियम उत्पादों का यूरोप को निर्यात संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ 'ऑपरेशन अटलांटा' के तहत एक प्रशासनिक व्यवस्था पर बातचीत कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बन सकेगा।साथ ही, नेविगेशन की आजादी के मामले में भी हमारी सोच काफी मिलती-जुलती है। मुझे उम्मीद है कि हम जल्द ही साइबर सुरक्षा, विदेशी दखल और जानकारी में हेर-फेर जैसे मुद्दों पर और काम कर पाएंगे; ये विषय यूरोप और भारत, दोनों के लिए बहुत अहम हैं। उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के बारे में भी बात की।
पश्चिमी एशिया संकट पर भी बोले ईयू के राजदूत
पश्चिम एशिया में चल रहे टकराव और इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) में हुई देरी के बारे में पूछे जाने पर, राजदूत ने कहा कि दोनों पक्ष इस पहल को पूरी प्राथमिकता दे रहे हैं और इसे हकीकत बनाने के लिए निवेश जारी रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि EU, भारत और लगभग हर कोई यह पक्का करना चाहता है कि हम नेविगेशन की पूरी आजादी को फिर से बहाल कर सकें और इस भौगोलिक स्थिति का इस्तेमाल यूरोप और भारत को करीब लाने के लिए कर सकें। IMEC प्रोजेक्ट का मकसद यही है।CBAM पर पाक्वेट ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए ब्रुसेल्स से एक टीम आएगी। अपने क्रेडेंशियल सौंपने के बाद मीडिया के साथ अपनी पहली बातचीत में राजदूत ने कहा कि तो, देखते हैं कि कितनी प्रगति हो पाती है। हमारे लिए, CBAM एक क्लाइमेट पॉलिसी उपाय है, और इसका मकसद कार्बन लीकेज को रोकना है। आप ऐसा यूरोपीय ऑपरेटर्स के लिए समान अवसर (लेवल प्लेइंग फील्ड) बनाकर करते हैं, लेकिन आप पार्टनर देशों में कार्बन प्राइसिंग को लागू करने को बढ़ावा देकर भी ऐसा करते हैं।
