भारत की इकोनॉमी 31 मार्च को खत्म होने वाले मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में 7.3% की दर से बढ़ने की उम्मीद है। इस बात की जानकारी शुक्रवार (5 जनवरी) को नेशनल स्टेटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) ने एडवांस एस्टीमेट रिपोर्ट जारी करते हुए दी।
NSO की ओर से जारी किया गया ग्रोथ का पहला एडवांस एस्टीमेट भारतीय रिजर्व बैंक यानी, RBI के हाल ही में जारी किए गए संशोधित अनुमान से भी अधिक है। RBI ने पिछले महीने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 7% कर दिया था।
नेशनल इनकम का यह एडवांस एस्टीमेट एक जरूरी आंकड़ा है। इस डेटा का यूज केंद्र सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए बजट तैयार करने में करती है।
यहां चिंता की बात
नॉमिनल जीडीपी कम: आम बजट में केंद्र सरकार ने नॉमिनल जीडीपी 10.5% रहने का अनुमान लगाया था। लेकिन यह घटकर केवल 8.9% ही रहा। इसके चलते देश का वित्तीय घाटा 6% के पार हो सकता है।
कृषि सेक्टर: खरीफ में कम उत्पादन और रबी की बुवाई अनुमान से कम होने के कारण केवल कृषि सेक्टर नीचे आया। यहां ग्रोथ रेट पिछले साल के मुकाबले 1.6% कम रही।
वित्त मंत्रालय ने GDP के 6.5% के पार रहने की उम्मीद जताई थी
29 दिसंबर को जारी की गई एनुअल इकोनॉमिक रिव्यू रिपोर्ट में वित्त मंत्रालय ने उम्मीद जताई थी कि जुलाई-सितंबर के ब्लॉकबस्टर आंकड़ों के बाद FY 2023-24 में भारत की GDP ग्रोथ रेट उसके 6.5% के पूर्वानुमान को आराम से पार कर जाएगी।
जुलाई-सितंबर में भारत की GDP ग्रोथ रेट 7.6% रही
स्टैटिस्टिक्स मिनिस्ट्री की ओर से 30 नवंबर को जारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई-सितंबर में भारत की GDP ग्रोथ रेट 7.6% रही, जो अर्थशास्त्रियों की 6.8% की उम्मीद से काफी ज्यादा है।
GDP 8% रहे तो भारत 2047 तक महाशक्ति
सब ठीक रहा तो 2050 तक दुनिया में नई आर्थिक शक्तियों का उदय होगा। इसमें तीन देश अहम होंगे। भारत, इंडोनेशिया और सऊदी अरब। भारत चाहता है कि देश की प्रति व्यक्ति GDP 3 साल पहले यानी 2047 में विश्व बैंक की अपर इनकम लिमिट (उच्च आय सीमा) को पार कर जाए। इंडोनेशिया का मानना है कि अमीर देशों की बराबरी करने के लिए उसके पास 2050 तक का समय है। क्योंकि उसके बाद उसकी आबादी बूढ़ी होने लगेगी।
इसी तरह सऊदी अरब तेल की बजाय अलग अर्थव्यवस्था के रूप में उभरना चाहता है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के मुताबिक, भारत और यूएई दोनों लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। भारत को यह लक्ष्य हासिल करने के लिए हर साल 8% GDP ग्रोथ की जरूरत होगी। यानी औसत से करीब 1.5% अधिक। इसी तरह इंडोनेशिया को 7% वृद्धि की जरूरत होगी।
ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट क्या है?
GDP इकोनॉमी की हेल्थ को ट्रैक करने के लिए उपयोग किए जाने वाले सबसे कॉमन इंडिकेटर्स में से एक है। GDP देश के भीतर एक स्पेसिफिक टाइम पीरियड में प्रोड्यूस सभी गुड्स और सर्विस की वैल्यू को रिप्रजेंट करती है। इसमें देश की सीमा के अंदर रहकर जो विदेशी कंपनियां प्रोडक्शन करती हैं उन्हें भी शामिल किया जाता है।
दो तरह की होती है GDP
GDP दो तरह की होती है। रियल और नॉमिनल। रियल GDP में गुड्स और सर्विस की वैल्यू का कैलकुलेशन बेस ईयर की वैल्यू या स्टेबल प्राइस पर किया जाता है। अभी GDP कैलकुलेशन के लिए बेस ईयर 2011-12 है। यानी 2011-12 में गुड्स और सर्विस के जो रेट थे उस हिसाब से कैलकुलेशन। वहीं नॉमिनल GDP का कैलकुलेशन करेंट प्राइस पर किया जाता है।
कैसे कैलकुलेट की जाती है GDP?
GDP कैलकुलेट करने के लिए एक फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता है। GDP=C+G+I+NX, यहां C का मतलब है प्राइवेट कंजम्प्शन, G का मतलब गवर्नमेंट स्पेंडिंग, I का मतलब इन्वेस्टमेंट और NX का मतलब नेट एक्सपोर्ट है।











