शिकायत में कहा गया है कि फ्लैट को संतोष गोयल ने नयति अस्पताल को किराए पर दिया था। किराए का समझौता खत्म होने के बाद संतोष ने फ्लैट 22 लाख रुपये में बेचने का प्रस्ताव नीरा राडिया को दिया। प्रस्ताव को नीरा राडिया ने स्वीकार कर लिया। संतोष गोयल को उन्होंने 22 लाख का चेक दे दिया। नयति अस्पताल के कर्मचारी इटावा के चकरनगर निगम के रहने वाले रविंद्र को अथॉरिटी लेटर देकर फ्लैट की रजिस्ट्री नीरा राडिया के नाम पर करवाने को कहा गया। इसके बाद दिल्ली स्थित उनके आवास पर रविंद्र को रजिस्ट्री के कागजात के साथ जाना था।
आरोप है कि रविंद्र ने संतोष के साथ मिलकर यह फ्लैट नीरा राडिया के नाम पर रजिस्ट्री कराने की जगह अपने नाम पर करा लिया। फ्लैट की वर्तमान कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस मामले में कोतवाली प्रभारी विजय कुमार सिंह ने कहा कि नीरा राडिया की ओर से उनके प्रतिनिधि जे मुरगन ने तहरीर दी है। इस तहरीर के आधार पर रविंद्र और संतोष के खिलाफ ठगी का केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।











