मूर्ति बोले- परिवार को इंफोसिस से अलग रखना गलत फैसला मैं गलत आदर्शवादी था, पत्नी सुधा कंपनी के दूसरे को-फाउंडर्स से ज्यादा काबिल थीं

मूर्ति बोले- परिवार को इंफोसिस से अलग रखना गलत फैसला मैं गलत आदर्शवादी था, पत्नी सुधा कंपनी के दूसरे को-फाउंडर्स से ज्यादा काबिल थीं

इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति ने कहा है कि परिवार को कंपनी से अलग रखना एक गलत फैसला था। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता था कि कॉर्पोरेट गवर्नेंस का मतलब है कि इसमें परिवार शामिल ना हो।

क्योंकि उन दिनों ज्यादातर बिजनेस फैमिली ओन्ड थे, जिनमें परिवार के बच्चे आते और कंपनी चलाते थे। इनमें कॉर्पोरेट के नियमों का भारी उलंघन होता था।’

नारायण मूर्ति ने ये बात CNBC को दिए एक इंटरव्यू में कही। उन्होंने कहा कि वो मानते थे कि उनकी पत्नी सुधा मूर्ति कंपनी के दूसरे को-फाउंडर्स से ज्यादा काबिल हैं। लेकिन, उन्होंने कभी भी सुधा को कंपनी जॉइन करने की परमिशन नहीं दी। इसी के साथ ही उन्होंने हफ्ते में 70 घंटे काम करने की सलाह देने वाले बयान का भी बचाव किया।

मूर्ति बोले- मैं गलत आदर्शवादी था
मूर्ति ने कहा इस गलती का एहसास उन्हें तब हुआ जब कुछ साल पहले वो फिलॉसफी के कुछ प्रोफेसर्स के साथ डिस्कशन कर रहे थे। प्रोफेसर्स ने उनसे कहा था, ऐसा करना उनकी गलती थी। मूर्ति ने कहा कि उन दिनों मैं जो कर रहा था वो मुझे आदर्शवाद लगता था। लेकिन अब लगता है, मैं गलत आदर्शवादी था।

मेरा बेटा इंफोसिस जॉइन करने के लिए कभी नहीं कहेगा
मूर्ति से पूछा गया कि उनके बेटे रोहन मूर्ति हॉर्व्ड में स्कॉलर हैं। अगर वो कल इंफोसिस जॉइन करने के लिए कहते हैं, तो आप क्या करेंगे? इसके जवाब में मूर्ति ने कहा, रोहन उनसे कहीं ज्यादा सख्त हैं। वो ऐसा कभी नहीं कहेंगे। रोहन मूर्ति 40 साल के हैं। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से PhD किया है। वो एक सॉफ्टवेयर फर्म के मालिक भी हैं। उनकी कंपनी डेटा प्रोसेसिंग का काम करती है।

नारायण मूर्ति ने 70 घंटे काम करने की सलाह का बचाव किया
यदि किसी ने किसी फील्ड में मुझसे ज्यादा सफलता हासिल की है, भले ही वह मेरे संबंधित हो उनका सम्मान करूंगा। मैं उससे पूछूंगा कि यह बयान देने में मुझसे कहां गलती हुई। दरअसल, नारायण मूर्ति ने पिछले साल भारतीय युवाओं को हफ्ते में 70 घंटे काम करने की सलाह दी थी। उनके इस बयान पर लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली थी। इसी बयान के बारे में जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने अपने बयान का बचाव किया।

1981 में की थी इंफोसिस की स्थापना
नारायण मूर्ति ने भारत के दूसरे सबसे बड़े टेक फर्म इंफोसिस की स्थापना 1981 में की थी। तब से लेकर 2002 तक कंपनी के CEO रहे थे। इसके बाद 2002 से 2006 तक बोर्ड के चेयरमैन रहे। अगस्त 2011 में चेयरमैन एमेरिटस की उपाधि के साथ मूर्ति कंपनी से रिटायर हो गए थे। हालांकि, एक बार फिर कंपनी में उनकी एंट्री 2013 में एग्जिक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर हुई। इस दौरान उनके बेटे रोहन मूर्ति उनके एग्जिक्यूटिव असिस्टेंट के तौर पर का कर रहे थे।


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