कोलकाता: पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव रिजल्ट को लेकर लोगों की निगाहें नंदीग्राम पर टिकी हैं। नंदीग्राम पंचायत चुनाव रिजल्ट सुवेंदु अधिकारी के लिए प्रतिष्ठा का विषय है। सुवेंदु अधिकारी इसी विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। खास बात यह है कि उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस सीट से हराया। अब टीएमसी पंचायत चुनाव में इस सीट को जीतकर अपना दबदबा साबित करना चाहती है। यह पंचायत सीट पूर्व में उथल-पुथल का शिकार रही है। इस बार भी यह सीट संवेदनशील मानी गई थी। पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनावों से पहले की झड़पों ने वर्ष 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान प्रभावित लोगों के गहरे घावों को हरा कर दिया है। पूर्व मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम के निवासी अब रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।
नंदीग्राम में पूर्व के वर्षों में पंचायत चुनाव प्रक्रिया के दौरान हिंसा हुई है। इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और भारतीय जनता पार्टी के बीच संघर्ष के कारण प्रतिद्वंद्वियों के बीच तनाव मौजूद है। दोनों ही दल अपना दबदबा कायम करने की कोशिश में हैं।
इसलिए सुवेंदु बनाम और ममता की लड़ाई
इस बार नंदीग्राम में चुनाव प्रक्रिया वर्ष 2013 और 2018 की तुलना में अधिक शांतिपूर्ण रही। इलाके में बम फेंकने की कई घटनाएं सामने आई थीं।
एक दशक की लंबी शांति के बाद, सोया हुआ गांव इस बार पंचायत चुनाव के दौरान सुर्खियों में रहा। सुवेंदु अधिकारी ने वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को चुनौती दी। बनर्जी को अपने प्रतिद्वंद्वी से मामूली अंतर से हार का समाना करना पड़ा।
टीएमसी को मिली थी 2018 के पंचायत चुनाव में जीत
नंदीग्राम पूर्व मेदिनीपुर जिला परिषद के तहत आता है और तृणमूल ने वर्ष 2008 में इसे वाममोर्चा से छीना था। तब से यहां तृणमूल को हार का सामना नहीं करना पड़ा है। इस क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस ने वर्ष 2013 और 2018 का पंचायत चुनाव बड़े अंतर से जीता था।
नंदीग्राम में पंचायत सीटों का समीकरण
गोकुलपुर, गोकुलनगर, गोपी मोहनपुर और हेरिया गांव भले ही भाजपा के गढ़ बन गए हैं, लेकिन सोनाचुरा, हरिपुर, खेजुरी, बृंदाबन चक, दाउदपुर और तेखाली का भरोसा तृणमूल कांग्रेस पर बरकरार है।
2008 से टीएमसी का कब्जा
नंदीग्राम पूर्व मेदिनीपुर जिला परिषद के अंतर्गत आता है। वर्ष 2008 से यहां पर टीएमसी का कब्जा रहा है, जब उसने पहली बार इस जिले में वाम मोर्चे को पटखनी दी थी। इस क्षेत्र में अल्पसंख्यकों की अच्छी खासी आबादी है। पार्टी ने क्षेत्र में 2013 और 2018 के ग्रामीण चुनावों में भारी अंतर से जीत हासिल की, जबकि आखिरी चुनाव मुख्य रूप से निर्विरोध रहा। हालांकि, 2021 में टीएमसी से निकलकर भाजपा में शामिल हुए शुभेंदु अधिकारी से मिली हार अब भी सत्तारूढ़ पार्टी के लिए टीस की तरह है।