भारत और मालदीव के बीच तनाव की शुरुआत तब हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे पर मालदीव के तीन मंत्रियों ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। भारत की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद इन तीनों मंत्रियों को हटा दिया गया लेकिन इसके साथ ही मालदीव का बहिष्कार भी शुरू हो गया। कई ट्रैवल एजेंसियों ने मालदीव के लिए फ्लाइट बुकिंग्स कैंसल कर दी। सोशल मीडिया पर #BoycottMaldives ट्रेंड करने लगा। कई भारतीयों ने मालदीव की बुकिंग कैंसल कर दी और इसका स्क्रीन शॉट सोशल माडिया पर शेयर किया। 2023 में मालदीव के टूरिज्म मार्केट में भारत की हिस्सेदारी 11% थी।
भारतीय टूरिस्ट्स से मोटी कमाई कर रहा था मालदीव, पीएम मोदी ने एक झटके में खत्म कर दिया खेल
नई दिल्ली: भारत और मालदीव के संबंधों में पिछले कुछ दिनों से तनातनी चल रही है। इससे मालदीव जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में काफी गिरावट आई है। मालदीव सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन हफ्ते में देश की टूरिज्म रैंकिंग में भारत पांचवें स्थान पर चला गया है। पिछले लगातार तीन साल मालदीव जाने वाले पर्यटकों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा थी। लेकिन 28 जनवरी के आंकड़ों के मुताबिक भारत की हिस्सेदारी महज आठ फीसदी रह गई है। इस रैंकिंग में रूस पहले, इटली दूसरे, चीन तीसरे, यूके चौथे और भारत पांचवें नंबर है। पिछले तीन हफ्ते के दौरान 13,989 भारतीय पर्यटक मालदीव पहुंचे।
इंडियन टूरिस्ट
मालदीव सरकार का आंकड़ों के मुताबिक 28 जनवरी तक कुल 174,400 पर्यटक मालदीव आए। इनमें केवल 13,989 भारतीय थे। इस दौरान रूस के 18,561, इटली के 18,111, चीन के 16,529 और यूके के 14,588 पर्यटक मालदीव पहुंचे। दिसंबर, 2023 में मालदीव के टूरिज्म मार्केट में रूस की हिस्सेदारी 24.1% और भारत की 23.4% थी। 2023 में दो लाख से अधिक भारतीय पर्यटकों ने मालदीव की यात्रा की। इसके बाद रूस और चीन का नंबर है। उससे पहले 2021 और 2022 में भी मालदीव जाने वाले पर्यटकों में भारत पहले नंबर पर था। 2021 में 2.91 लाख से अधिक भारतीय मालदीव पहुंचे थे जबकि 2022 में यह संख्या 2.41 लाख थी।











