दुबले-पतला शरीर, भूख हड़ताल और मराठा आंदोलन से हिला दी महाराष्ट्र की सरकार... जानें मनोज जरांगे कौन

दुबले-पतला शरीर, भूख हड़ताल और मराठा आंदोलन से हिला दी महाराष्ट्र की सरकार... जानें मनोज जरांगे कौन
महाराष्ट्र के जालना जिले में मराठा आरक्षण आंदोलन शुक्रवार को हिंसक हो गया। जमकर लाठीचार्ज हुआ। इस लाठीचार्ज में कई लोग घायल हो गए। अंबाड तहसील में धुले-सोलापुर रोड पर अंतरवाली सराथी गांव में हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज करना पड़ा। आंसू गैस के गोले छोड़े गए। मराठाओं पर लाठीचार्ज को लेकर सिसायत तेज हो गई है। विपक्ष ने शिंदे, पवार और फडणवीस की सरकार को निशाने पर लिया। बीजेपी पर हमले शुरू हो गए। आखिर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लाठीचार्ज के मामले में माफी मांगनी पड़ी। इस पूरे घटनाक्रम में एक नाम खूब चर्चा में है। यह नाम हे मनोज जारांगे का। मनोज जरांगे ही मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे हैं। वह भूख हड़ताल कर रहे हैं।

बीड में हुआ जन्म, जालना में बसे

मनोज जरांगे पाटील मूलतः महाराष्ट्र के बीड के रहने वाले हैं। यहां छोटे से गांव मातोरी गांव में उनका जन्म हुआ था। आजीविका के लिए वह बीड से जालना के अंबाद आकर बस गए। यहां उन्होंने एक होटल में काम किया। हालांकि कुछ समय बाद मनोज जरांगे पाटील ने कांग्रेस जॉइन की। वह कांग्रेस के एक छोटे से कार्यकर्ता थे। हालांकि कुछ समय बाद वह कांग्रेस से अलग हो गए।

12 तक ही की पढ़ाई

मनोज जरांगे देखने में बहुत दुबले-पतले हैं। मनोज जरांगे लंबे समय से मराठा आंदोलन से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 2010 में 12वीं पास की और उसके बाद ही पढ़ाई छोड़ दी थी। पढ़ाई छोड़कर वह मराठा आंदोलन से जुड़ गए। होटल में नौकरी करके थोड़ी आमदनी होती लेकिन उसके बावजूद मराठा आंदोलन की चाहत ने उन्हें पीछे नहीं हटने दिया।

मराठा आरक्षण आंदोलन का बड़ा चेहरा

मनोज जरांगे ने मराठा आंदोलन की मुहिम 2011 से शुरू की। 2023 में अब तक उन्होंने 30 से ज्यादा बार आरक्षण के लिए आंदोलन किया। मनोज जरांगे को मराठा आरक्षण आंदोलन का बड़ा चेहरा माना जाता है। मराठवाड़ा एरिया में उनका बहुत सम्मान है। 2016 से 2018 तक जालना में मराठा आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व भी मनोज जरांगे ने ही किया था।

मराठा आरक्षण आंदोलन के लिए बेची जमीन

मनोज जरांगे के परिवार में उनके माता-पिता, पत्नी, 3 भाई और 4 बच्चे हैं। मनोज की पारिवारिक आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है लेकिन वह अपनी मराठा आंदोलन की मुहिम को परिवार से ज्यादा महत्व देते हैं। मनोज ने मराठा आरक्षण आंदोलन के लिए अपना एक संगठन बना रखा है। उसका नाम मनोज ने 'शिवबा' रखा है। मनोज के पास महज 4 एकड़ पैतृक जमीन थी। आंदोलन के लिए उन्होंने उस 4 एकड़ में 2 एकड़ जमीन भी बेच दी है।

​8 दिन से भूख हड़ताल पर​

मनोज जारांगे आठ दिनों से अंतरवाली सराती गांव में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। अर्जुन खोतकर और नारायण कुचे दोनों ने मंगलवार सुबह मनोज जारांगे से मुलाकात की। उन्होंने मराठा आरक्षण को लेकर राज्य सरकार का पक्ष मनोज जारांगे के सामने रखा। सरकार की ओर से जो भी नेता, मंत्री मराठा आंदोलन प्रदर्शन को शांत करना चाहता है, वे सभी मनोज जरांगे से ही मिल रहे हैं।
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