पुराने दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की पहल
समय के साथ भोपाल जिले के कई पुराने राजस्व अभिलेख खराब हो चुके हैं। खसरा, खतौनी और नामांतरण जैसे दस्तावेज जमीन की खरीद-बिक्री, नामांतरण, बैंक ऋण और न्यायालयीन मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्तमान व्यवस्था में लोक सेवा गारंटी के तहत आवेदन करने के बाद भी इन रिकॉर्ड को प्राप्त करने में लंबा समय लग जाता है। इसी समस्या के समाधान के लिए जिले के सभी पुराने भू-अभिलेखों का डिजिटलाइजेशन किया जा रहा है।
जुलाई से शुरू हुआ तीसरा चरण
जुलाई से डिजिटलाइजेशन अभियान का तीसरा चरण शुरू हो चुका है। इस चरण के पूरा होने के बाद सभी पुराने रिकॉर्ड भू-अभिलेख पोर्टल पर उपलब्ध करा दिए जाएंगे। इससे आम नागरिकों के साथ-साथ राजस्व अधिकारियों को भी वर्षों पुराने दस्तावेज तलाशने में आसानी होगी। साथ ही बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और पारदर्शी बनेगी।
स्कैनिंग के बाद होगा ऑनलाइन सत्यापन
डिजिटलाइजेशन प्रक्रिया के तहत पहले दस्तावेजों की स्कैनिंग की जा रही है। इसके बाद प्रत्येक दस्तावेज का मेटाडाटा तैयार किया जाएगा। अगले चरण में संबंधित हल्के के पटवारी ऑनलाइन सत्यापन करेंगे। सत्यापन पूरा होने के बाद ही रिकॉर्ड भू-अभिलेख पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए जाएंगे।
आठ लाख पेज किए जा रहे स्कैन
लालघाटी स्थित हुजूर तहसील के नए भवन में डिजिटलाइजेशन का कार्य जारी है। यहां कर्मचारी दस्तावेजों की स्कैनिंग में लगे हुए हैं। अगले तीन महीने में करीब आठ लाख पेज स्कैन किए जाएंगे। प्रत्येक दस्तावेज का सत्यापन भी किया जाएगा।
