कहा कि जब कोई देश और समाज आगे बढ़ता है, तो दुनिया को उसके बदलते स्वरूप को लेकर एक अडजेस्टमेंट की प्रक्रिया से गुजरना होता है। यह प्रक्रिया अचानक से नहीं होती, उसमें समय लगता है। हालांकि ये जरूरी है कि हमें पता हो कि अपनी बात दुनिया तक कैसे पहुंचाए, कैसे अपने नरेटिव को दुनिया को समझाएं। विदेश मंत्री ने ईटी अवॉर्ड्स के दौरान हुई एक पैनल बातचीत में ये बातें कही। उनका ये बयान नागरिकता संशोधन कानून को लेकर अमेरिका समेत दूसरे देशों की प्रतिक्रिया को लेकर था।
दुनिया देख रही बदलाव
उन्होंने कहा कि इस कानून को लेकर कुछ देशों ने ऐसे नरेटिव को एकदम से अपना लिया जो वोटबैंक की राजनीति से जुड़ा हुआ है। हालांकि ये देश विभाजन जैसे उन हालातों के परिणाम को नहीं समझ पा रहे जिसके परिणामस्वरूप भारत सरकार की ओर से लोगों को प्राकृतिक रूप से नागरिकता दी जा रही है। विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि ये देश खुद धर्म और भाषा का सहारा लेकर नागरकिता जैसे मुद्दों का सामाधान करते हैं।विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया भारत में हर ओर हो रहे सकारात्मक बदलाव को देख रही है। दुनिया न सिर्फ गवर्नेंस में सुधार को देख पा रही है, बल्कि उसकी नजर उस संभावना पर भी है जो किसी लोकतांत्रिक राजनीति में एक साथ तीन सफल कार्यकालों से जुड़ी है, ये इस सदी की बेहद खास बात है।











