लाखों सैनिकों ने लड़ा युद्ध
फ्रांस में बैस्टिल दिवस को 'फेटे नेशनले फ्रांसेइस या राष्ट्रीय दिवस के तौर पर भी जाना जाता है। 14 जुलाई सन् 1789 में हुई फ्रांसीसी क्रांति के दौरान इस दिन बैस्टिल के किले पर हमला हुआ था। इस दिन को उस हमले की याद के तौर पर मनाया जाता है। इस बार मिलिट्री परेड में तीनों भारतीय सेनाओं की 269 सैनिकों वाली टुकड़ी फ्रांस की सेनाओं के साथ मार्च करते हुए दिखाई देगी। भारत और फ्रांस की सेनाओं के बीच प्रथम विश्व युद्ध से ही आपसी संपर्क जारी है। इस युद्ध में लाखों भारतीय सैनिकों ने हिस्सा लिया था। इनमें से करीब 74,000 सैनिकों ने कीचड़ भरी खाइयों में लड़ाई लड़ी थी। ये सैनिक फिर कभी वापस नहीं लौटे। जबकि बाकी 67,000 सैनिक घायल हो गए थे।
फ्रांस में बैस्टिल दिवस को 'फेटे नेशनले फ्रांसेइस या राष्ट्रीय दिवस के तौर पर भी जाना जाता है। 14 जुलाई सन् 1789 में हुई फ्रांसीसी क्रांति के दौरान इस दिन बैस्टिल के किले पर हमला हुआ था। इस दिन को उस हमले की याद के तौर पर मनाया जाता है। इस बार मिलिट्री परेड में तीनों भारतीय सेनाओं की 269 सैनिकों वाली टुकड़ी फ्रांस की सेनाओं के साथ मार्च करते हुए दिखाई देगी। भारत और फ्रांस की सेनाओं के बीच प्रथम विश्व युद्ध से ही आपसी संपर्क जारी है। इस युद्ध में लाखों भारतीय सैनिकों ने हिस्सा लिया था। इनमें से करीब 74,000 सैनिकों ने कीचड़ भरी खाइयों में लड़ाई लड़ी थी। ये सैनिक फिर कभी वापस नहीं लौटे। जबकि बाकी 67,000 सैनिक घायल हो गए थे।
बहादुरी से लड़े सैनिक
भारत के सैनिक फ्रांस की धरती पर भी बहुत बहादुरी से लड़े थे। उनके साहस, वीरता और सर्वोच्च बलिदान से न केवल दुश्मन को विफल कर दिया था,बल्कि उन्होंने युद्ध जीतने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसके बाद दूसरे विश्व युद्ध में 25 लाख से अधिक भारतीय सैनिकों ने एशिया से लेकर अफ्रीका और यूरोप तक युद्ध के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनके योगदान में फ्रांस के युद्धक्षेत्र भी शामिल रहे थे। भारतीय सैनिकों ने इन युद्धों में अपनी वीरता के मानदंड स्थापित किए, जिसकेकारण भारतीय सैनिकों को अनेक वीरता पुरस्कारों के रूप में अच्छी पहचान मिली।
साझेदारी के 25 साल
भारत के सैनिक फ्रांस की धरती पर भी बहुत बहादुरी से लड़े थे। उनके साहस, वीरता और सर्वोच्च बलिदान से न केवल दुश्मन को विफल कर दिया था,बल्कि उन्होंने युद्ध जीतने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसके बाद दूसरे विश्व युद्ध में 25 लाख से अधिक भारतीय सैनिकों ने एशिया से लेकर अफ्रीका और यूरोप तक युद्ध के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनके योगदान में फ्रांस के युद्धक्षेत्र भी शामिल रहे थे। भारतीय सैनिकों ने इन युद्धों में अपनी वीरता के मानदंड स्थापित किए, जिसकेकारण भारतीय सैनिकों को अनेक वीरता पुरस्कारों के रूप में अच्छी पहचान मिली।
साझेदारी के 25 साल
इस साल दोनों देश रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त अभ्यासों में हिस्सा ले रही हैं और अपने-अपने अनुभवों को भी साझा कर रही हैं। पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत और फ्रांस विश्वसनीय रक्षा भागीदार बन गए हैं। भारतीय सेना की टुकड़ी में 77 मार्चिंग सैनिक और बैंड के 38 सदस्य भी शामिल है। इसका नेतृत्व कैप्टन अमन जगताप कर रहे हैं। भारतीय नौसेना टुकड़ी का नेतृत्व कमांडर व्रत बघेल जबकि भारतीय वायु सेना की टुकड़ी का नेतृत्व स्क्वाड्रन लीडर सिंधु रेड्डी कर रहे हैं। भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमान भी परेड के दौरान फ्लाई पास्ट में भाग लेंगे।
पंजाब रेजिमेंट कर रही अगुवाई
राजपूताना राइफल्स का बैंड
इस सैन्य टुकड़ी में राजपूताना राइफल्स रेजिमेंट बैंड भी शामिल है। यह रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ राइफल रेजिमेंट है। इसकी अधिकांश बटालियनों का एक लंबा और गौरवशाली इतिहास रहा है। इसके सैनिकों ने दुनिया के कई क्षेत्रों में सबसे खूनी लड़ाइयों में भाग लिया है। इस रेजिमेंट के सैनिकों ने दोनों विश्व युद्धों में अनुकरणीय साहस का प्रदर्शन किया है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरानइसरेजिमेंट की बटालियनों ने हर उस क्षेत्र कीलड़ाइयों में भाग लिया, जिनमें भारतीय सेना शामिल रही थी। इस रेजिमेंट नेस्वतंत्रता पूर्व छह विक्टोरिया क्रॉस के हासिल किए थे। इस रेजिमेंट के बैंड की नसीराबाद (राजस्थान) में 1920 में स्थापना हुई थी।
