भारत की आर्थिक तरक्की
गोवा में शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) देशों के विदेश मंत्रियों का एक सम्मेलन मई के महीने में भारत के राज्य गोवा में हुआ था। इस सम्मेलन में ही हिस्सा लेने के लिए बिलावल भारत आए थे। फ्राइडे टाइम्स के मुताबिक क्षेत्र में जिस तरह से नए समीकरण बन रहे हैं जो अर्थव्यवस्था की वास्तविकताओं, भू-राजनीति और रणनीतिक साझेदारियों पर आधारित हैं, उसके बाद पाकिस्तान के लिए लंबे समय तक भारत को नजरअंदाज करना मुश्किल है। आर्टिकल में लिखा है कि भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। उसका आर्थिक विकास विभिन्न क्षेत्रीय सहयोग और सहयोग के कई अवसर पेश करता है। ऐसे में पाकिस्तान को आर्थिक रूप से समृद्ध अपने पड़ोसी के साथ मजबूत संबंध बनाने की जरूरत है।
गोवा में शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) देशों के विदेश मंत्रियों का एक सम्मेलन मई के महीने में भारत के राज्य गोवा में हुआ था। इस सम्मेलन में ही हिस्सा लेने के लिए बिलावल भारत आए थे। फ्राइडे टाइम्स के मुताबिक क्षेत्र में जिस तरह से नए समीकरण बन रहे हैं जो अर्थव्यवस्था की वास्तविकताओं, भू-राजनीति और रणनीतिक साझेदारियों पर आधारित हैं, उसके बाद पाकिस्तान के लिए लंबे समय तक भारत को नजरअंदाज करना मुश्किल है। आर्टिकल में लिखा है कि भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। उसका आर्थिक विकास विभिन्न क्षेत्रीय सहयोग और सहयोग के कई अवसर पेश करता है। ऐसे में पाकिस्तान को आर्थिक रूप से समृद्ध अपने पड़ोसी के साथ मजबूत संबंध बनाने की जरूरत है।
कायम होगी क्षेत्र में शांति
द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के रास्ते तलाशने से दोनों देशों के लिए जीत की स्थिति बन सकती है। इससेक्षेत्र में आर्थिक विकास और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा। इस आर्टिकल में यह भी लिखा है कि दोनों देशों के लिए लंबे समय से चले आ रहे कश्मीर के मुद्दे पर नजर डालना भी जरूरी है। अखबार के मुताबिक यह मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का केंद्र बिंदु रहा है। साल 2019 में भारत ने जब अनुच्छेद 370 को हटाया तो तनाव और बढ़ बया। दूसरी ओर अफगानिस्तान में भी भारत का प्रभाव बढ़ रहा है। रचनात्मक बातचीत में शामिल होकर, पाकिस्तान और भारत साथ मिलकर शांतिपूर्ण और समृद्ध अफगानिस्तान के प्रयासों को आगे बढ़ा सकते हैं। इससे क्षेत्र में लंबे समय तक शांति कायम होगी और साथ ही आर्थिक विकास को भी आगे बढ़ाया जा सकेगा।
द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के रास्ते तलाशने से दोनों देशों के लिए जीत की स्थिति बन सकती है। इससेक्षेत्र में आर्थिक विकास और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा। इस आर्टिकल में यह भी लिखा है कि दोनों देशों के लिए लंबे समय से चले आ रहे कश्मीर के मुद्दे पर नजर डालना भी जरूरी है। अखबार के मुताबिक यह मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का केंद्र बिंदु रहा है। साल 2019 में भारत ने जब अनुच्छेद 370 को हटाया तो तनाव और बढ़ बया। दूसरी ओर अफगानिस्तान में भी भारत का प्रभाव बढ़ रहा है। रचनात्मक बातचीत में शामिल होकर, पाकिस्तान और भारत साथ मिलकर शांतिपूर्ण और समृद्ध अफगानिस्तान के प्रयासों को आगे बढ़ा सकते हैं। इससे क्षेत्र में लंबे समय तक शांति कायम होगी और साथ ही आर्थिक विकास को भी आगे बढ़ाया जा सकेगा।
अमेरिका से बढ़ी करीबी
अखबार का मानना है कि अमेरिका के साथ भारत की बढ़ती निकटता क्षेत्र में जटिलता को बढ़ाती हैं। अमेरिका, भारत को चीन का मुकाबला करने में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखता है। दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA) और कम्युनिकेशंस कम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (COMCASA) जैसे विभिन्न सहयोग समझौते हुए हैं। पाकिस्तान को इस साझेदारी के रणनीतिक फायदों को पहचानना होगा। साथ ही उसे उभरते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच अपने हितों की रक्षा के लिए भारत के साथ रणनीतिक रूप से जुड़ने की जरूरत है।
बदलनी होगी सोच
अखबार का मानना है कि अमेरिका के साथ भारत की बढ़ती निकटता क्षेत्र में जटिलता को बढ़ाती हैं। अमेरिका, भारत को चीन का मुकाबला करने में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखता है। दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA) और कम्युनिकेशंस कम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (COMCASA) जैसे विभिन्न सहयोग समझौते हुए हैं। पाकिस्तान को इस साझेदारी के रणनीतिक फायदों को पहचानना होगा। साथ ही उसे उभरते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच अपने हितों की रक्षा के लिए भारत के साथ रणनीतिक रूप से जुड़ने की जरूरत है।
बदलनी होगी सोच











