बांग्लादेश में राजनीतिक संकट से भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को कितना फायदा? जानें सबकुछ

बांग्लादेश में राजनीतिक संकट से भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को कितना फायदा? जानें सबकुछ
नई दिल्ली: बांग्लादेश में आया राजनीतिक तूफान रुकने का नाम नहीं ले रहा है। शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने और फिर देश छोड़ने के बाद लग रहा था कि सबकुछ पटरी पर लौट आएगा। वहीं मोहम्मद युनूस की अगुवाई पर अंतरिम सरकार से लोगों को कुछ उम्मीदें लगी थीं, लेकिन अब वह भी धूमिल होती नजर आ रही हैं। बांग्लादेश में अभी भी हिंसा पूरी तरह शांत नहीं हुई है। इसका सबसे ज्यादा असर वहां की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर पड़ रहा है। माना जा रहा है कि इसका फायदा भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को मिल सकता है। ऐसा होना क्यों मुश्किल है, आइए समझते हैं:

इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद


बांग्लादेश में पहली कपड़ा फैक्ट्री 1978 में खुली थी। आज वहां 40 लाख लोग इस काम में लगे हैं। GDP में 10% हिस्सेदारी टेक्सटाइल इंडस्ट्री की है। पिछले साल उसने 54 बिलियन डॉलर कीमत के कपड़े निर्यात किए थे।

सस्ती मजदूरी


बांग्लादेश की कपड़ा फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों में ज्यादातर महिलाएं हैं। फिर, मजदूरी बेहद सस्ती है वहां, जिससे लागत कम आती है। हालांकि कम मजदूरी का मुद्दा वहां उठता रहा है।

सरकार की नीति


बांग्लादेशी सरकार ने एक्सपोर्ट प्रॉसेसिंग जोन डिवेलप किए हैं। EU और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों के साथ ट्रेड एग्रीमेंट है। टेक्सटाइल इंडस्ट्री को टैक्स में छूट और सब्सिडी दी जाती है। वहीं, भारत ने अपना फोकस कैपिटल इंटेसिव सेक्टर जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स पर रखा है।

भारत का आयात शुल्क


कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत अपने घरेलू उद्योगों को लेकर बहुत ज्यादा प्रोटेक्टिव है, जिससे घाटा हो रहा है। लोकल मैन्युफैक्चरर जिन कपड़ों और दूसरी चीजों का इस्तेमाल करते हैं, उस पर 2017 के बाद से 13% इम्पोर्ट टैरिफ बढ़ाया जा चुका है।

पश्चिम की पसंद


पश्चिम को जिस पैमाने पर और जैसा प्रॉडक्ट चाहिए, अब उसमें बांग्लादेश को विशेषज्ञता हासिल हो चुकी है। यूरोपीय मार्केट में भारत के मुकाबले बांग्लादेशी उद्यमियों की पहुंच फिलहाल ज्यादा है।
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