चांद से टकराकर हुआ क्रैश
रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने शनिवार को लूना के 'असामान्य स्थिति' में फंसे होने की जानकारी दी थी। अंतरिक्ष एजेंसी ने रविवार को इसके क्रैश होने की खबर दी। एजेंसी का कहना था कि स्पेसक्राफ्ट से उसका संपर्क टूट गया था क्योंकि वह लैंडिंग से पहले की कक्षा में चला गया था। रोस्कोस्मोस ने कहा कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि लूना-25 के मैनुवर के समय वास्तविक और अनुमानित गणना में विचलन हुआ था। इस वजह से स्पेसक्राफ्ट एक ऐसी कक्षा में चला गया जिसकी उम्मीद नहीं थी। इसी वजह से यह चांद से टकराकर क्रैश हो गया।
रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने शनिवार को लूना के 'असामान्य स्थिति' में फंसे होने की जानकारी दी थी। अंतरिक्ष एजेंसी ने रविवार को इसके क्रैश होने की खबर दी। एजेंसी का कहना था कि स्पेसक्राफ्ट से उसका संपर्क टूट गया था क्योंकि वह लैंडिंग से पहले की कक्षा में चला गया था। रोस्कोस्मोस ने कहा कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि लूना-25 के मैनुवर के समय वास्तविक और अनुमानित गणना में विचलन हुआ था। इस वजह से स्पेसक्राफ्ट एक ऐसी कक्षा में चला गया जिसकी उम्मीद नहीं थी। इसी वजह से यह चांद से टकराकर क्रैश हो गया।
शॉर्टकट बना दुश्मन
19 और 20 अगस्त को डिवाइस तलाशने की कोशिशें भी की गईं, लेकिन कोई सफलता हाथ नहीं लगी। रशियनस्पेस वेब के पब्लिशर अनातोली जक ने इस क्रैश के पीछे की वजहों का अंदाजा लगाया है। उन्होंने कहा कि लूना-25 का फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम बेहद कमजोर था। इसे कई बार सुधारा गया था। वहीं भारत के चंद्रयान 3 समेत अमेरिका और चीन ने मिशन के लिए जो रास्ता चुना, रूस ने उसे नजरअंदाज कर दिया। एक अति महत्वाकांक्षी लैंडिंग इस पूरी असफलता की सबसे बड़ी वजह है।
लूना-25 के वैज्ञानिक संचालन का नेतृत्व करने वाले रूस की साइंस एकेडमी के स्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट के सीनियर साइंटिस्ट नतान ईस्मोंट ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया गया कि स्पेसक्राफ्ट में जो इंजन लगा था उसमें जब आग लगी तो स्पेसक्राफ्ट की डिजाइन ऐसी नहीं थी जो इसकी गति के साथ खुद को एडजस्ट कर सके।
जोर से लगे ब्रेक
19 और 20 अगस्त को डिवाइस तलाशने की कोशिशें भी की गईं, लेकिन कोई सफलता हाथ नहीं लगी। रशियनस्पेस वेब के पब्लिशर अनातोली जक ने इस क्रैश के पीछे की वजहों का अंदाजा लगाया है। उन्होंने कहा कि लूना-25 का फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम बेहद कमजोर था। इसे कई बार सुधारा गया था। वहीं भारत के चंद्रयान 3 समेत अमेरिका और चीन ने मिशन के लिए जो रास्ता चुना, रूस ने उसे नजरअंदाज कर दिया। एक अति महत्वाकांक्षी लैंडिंग इस पूरी असफलता की सबसे बड़ी वजह है।
लूना-25 के वैज्ञानिक संचालन का नेतृत्व करने वाले रूस की साइंस एकेडमी के स्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट के सीनियर साइंटिस्ट नतान ईस्मोंट ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया गया कि स्पेसक्राफ्ट में जो इंजन लगा था उसमें जब आग लगी तो स्पेसक्राफ्ट की डिजाइन ऐसी नहीं थी जो इसकी गति के साथ खुद को एडजस्ट कर सके।
जोर से लगे ब्रेक
लेना चाहिए था थोड़ा और समय
उन्होंने आखिरी में कहा कि शायद ब्रेक जोर से लगाए गए या फिर स्पेसक्राफ्ट बहुत तेज था या हो सकता है कि यह गलत दिशा में था। इस्मोंट का कहना था कि शायद मिशन मैनेजर्स को और ज्यादा समय लेना चाहिए था। वैज्ञानिक और अंतरिक्ष विशेषज्ञ क्रैश के पीछे की वजहों का अंदाजा लगा रहे हैं। जबकि रोस्कोस्मोस ने लूना-25 की दुर्घटना की जांच के लिए पहले ही एक टीम का गठन कर दिया है।











