चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली बेंच ने कहा कि डीएमआरसी द्वारा जमा की गई राशि वापस कर दी जाएगी। याचिकाकर्ता द्वारा जबरदस्ती कार्रवाई के हिस्से के रूप में भुगतान की गई किसी भी राशि को वापस करना होगा। डीएमआरसी और डीएएमईपीएल ने 2008 में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से सेक्टर 21 द्वारका तक 30 वर्षों के लिए एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस लाइन को डिजाइन, स्थापित, कमीशन, संचालित और बनाए रखने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। डीएमआरसी ने सभी सिविल स्ट्रक्चर का निर्माण किया जबकि सिस्टम वर्क डीएएमईपीएल के पास था। जुलाई, 2012 में वायाडक्ट में कुछ कमियों पाए जाने के बाद डीएएमईपीएल ने ऑपरेशन सस्पेंड कर दिया और डीएमआरसी को समस्या को ठीक करने के लिए नोटिस दिया।
क्या है मामला
अक्टूबर 2012 में, DAMEPL ने टर्मिनेशन नोटिस दिया। अधिकारियों ने नवंबर 2012 में इस लाइन का निरीक्षण किया और जनवरी 2013 में ऑपरेशन बहाल करने के लिए हरी झंडी दे दी। डीएएमईपीएल ने फिर से ऑपरेशन शुरू किया लेकिन जून 2013 में पांच महीने के भीतर ही परियोजना को छोड़ दिया। डीएमआरसी ने आर्बिटेशन क्लॉज का सहारा लिया। मध्यस्थता पंचाट ने DAMEPL के पक्ष में फैसला सुनाया और DMRC को 2017 में 2,782.33 करोड़ रुपये का भुगतान करने को कहा। डीएमआरसी ने इसे दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी लेकिन एकल पीठ ने उसकी याचिका खारिज कर दी। लेकिन बेंच ने मध्यस्थता पंचाट के आदेश को भारत की सार्वजनिक नीति के विरुद्ध बताते हुए रद्द कर दिया।इसके बाद, अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी सुप्रीम कोर्ट चली गई। साल 2021 में, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि मध्यस्थता पंचाट के फैसलों को चुनौती नहीं दी जा सकती और उसने अवॉर्ड को बरकरार रखा। इस फैसले के बाद ही डीएमआरसी ने क्यूरेटिव याचिका दायर की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल, 2024 को स्वीकार कर लिया। ऑरिजिनल आर्बिट्रल अवॉर्ड 2021 के अंत तक बढ़कर 7,045.41 करोड़ रुपये था जब DAMEPL ने दिल्ली उच्च न्यायालय से 2017 के आदेश को लागू करने के लिए कहा था। डीएमआरसी ने तब तक 1,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया था और अदालत को बताया था कि वह आर्बिट्रल अवॉर्ड का भुगतान करने की स्थिति में नहीं है। उसने कहा कि दिल्ली सरकार और आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को यह भुगतान करना चाहिए। आज, राशि बढ़कर 8,000 करोड़ रुपये हो गई है।











