इकनॉमिक सर्वे के बदले सरकार ने एक आर्थिक रिपोर्ट जारी की थी। ‘द इंडियन इकोनॉमी: ए रिव्यू’ नाम की इस रिपोर्ट में देश के पिछले दस साल का लेखाजोखा है। साथ ही इसमें आने वाले वर्षों में देश की इकॉनमी के आउटलुक के बारे में भी बताया गया है। यह रिपोर्ट चीफ इकनॉमिक एडवाइजर वी अनंत नागेश्वरन के ऑफिस ने तैयार की है। इसमें कहा गया है कि अगले तीन साल में भारत पांच ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बन जाएगा जबकि साल 2030 तक इसका आकार सात ट्रिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत अगले साल सात फीसदी की दर से ग्रोथ कर सकता है। पिछले साल भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख इकॉनमी रहा था। इस साल भी यह उम्मीद की जा रही है।
क्या होता है इकॉनमिक सर्वे
इकनॉमिक सर्वे एक वित्तीय दस्तावेज होता है। इसमें पिछले एक फाइनेंशियल ईयर के दौरान देश के आर्थिक विकास की समीक्षा की जाती है। इसे इंडस्ट्री, एग्रीकल्चर, इंडस्ट्रियल प्रॉडक्शन, रोजगार, महंगाई और एक्सपोर्ट जैसे आंकड़ों के आधार पर तैयार किया जाता है। साथ ही मनी सप्लाई और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे दूसरे कई पहलुओं पर भी गौर किया जाता है। यह सर्वे डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक अफेयर्स का इकनॉमिक्स डिवीजन चीफ इकनॉमिक एडवाइजर के मार्गदर्शन में तैयार करता है। इसमें ना सिर्फ पिछले वित्त वर्ष की आर्थिक तस्वीर बयां की जाती है बल्कि अगले वित्त वर्ष की दिशा की भी जानकारी मिलती है।देश का पहला इकनॉमिक सर्वे 1950-51 में पेश किया गया था। उसके बाद साल 1964 तक इसे केंद्रीय बजट के साथ पेश किया जाता था। लेकिन 1964 से इसे बजट से अलग कर दिया गया। सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि इस बार बजट में वित्त मंत्री कोई बड़ी घोषणा नहीं करेंगी क्योंकि यह अंतरिम बजट है। देश में अप्रैल-मई में लोक सभा चुनाव होने हैं। चुनावों के बाद बनने वाली नई सरकार जुलाई में फुल बजट पेश करेगी। इंडियन इकॉनमी- ए रिव्यू में कहा गया है कि फाइनेंशियल ईयर 2024 में देश का ग्रोथ रेट 7 परसेंट रहने का अनुमान है।











