कोटक महिंद्रा बैंक के साथ 97% डिस्काउंट पर हुई डील शेयरों में करीब 2% की तेजी

कोटक महिंद्रा बैंक के साथ 97% डिस्काउंट पर हुई डील शेयरों में करीब 2% की तेजी

प्राइवेट लेंडर RBL बैंक लिमिटेड ने स्ट्रेस्ड एसेट डील में लगभग 800 करोड़ रुपए के बैड लोन कोटक महिंद्रा बैंक को बेच दिए हैं। ये ट्रांजैक्शन एसेट की ग्रॉस बुक वैल्यू के 97-98% डिस्काउंट पर हुई है। यानी बैंक के लिए यह 2-3% का रिटर्न है।

ET ने मामले से जुड़े लोगों के हवाले से इसे लेकर एक रिपोर्ट पब्लिश की है। रिपोर्ट के मुताबिक कोटक बैंक को ₹793 करोड़ में बेचे गए पोर्टफोलियो में RBL का क्रेडिट कार्ड बकाया और राइट-ऑफ ड्यूज शामिल हैं। ये सभी कोविड के समय के बैड लोन्स थे।

ये ट्रांजैक्शन RBL बैंक को अपने रिटेल लोन पोर्टफोलियो को साफ करने और मैनेजमेंट बैंडविड्थ को फ्री करने की अनुमति देगा ताकि बुक को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। ऐसी सेल्स रेगुलर बिजनेस का हिस्सा होती है।

सितंबर तिमाही में था 2,441 करोड़ रुपए का NPA
30 सितंबर तक, RBL बैंक के ग्रॉस नॉन परफॉर्मिंग एसेट 2,441 करोड़ रुपए थे, जो तिमाही-दर-तिमाही 1.5% अधिक थे। नॉन-होलसेल बैड लोन्स 1,328 करोड़ रुपए के थे। क्रेडिट कार्ड के बैड लोन का योगदान 443 करोड़ रुपए था।

एक साल में RBL ने 51% का रिटर्न दिया
RBL के शेयरों ने पिछले एक साल में 51% और बीते एक महीने में 16% का रिटर्न दिया है। आज के कारोबार में शेयर करीब 2% चढ़कर 286 रुपए के करीब कारोबार कर रहा है। हालांकि, पिछले 5 साल में बैंक का मार्केट कैप आधा से ज्यादा गिरकर ₹17.20 हजार करोड़ रह गया है।

Q2FY24 में बैंक को ₹294 करोड़ का प्रॉफिट
RBL ने पिछले साल 21 अक्टूबर को दूसरी तिमाही के नतीजे जारी किए थे। जुलाई-सितंबर क्वार्टर में बैंक ने ₹294 करोड़ का प्रॉफिट दर्ज किया था। सालाना आधार पर इसमें 46% की बढ़ोतरी देखी गई थी। नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) की बात करें तो यह ₹1,474.98 रही।

NPA क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति या संस्था किसी बैंक से लोन लेकर उसे वापस नहीं करती, तो उस लोन अकाउंट को क्लोज कर दिया जाता है। इसके बाद उसकी नियमों के तहत रिकवरी की जाती है। ज्यादातर मामलों में यह रिकवरी हो ही नहीं पाती या होती भी है तो न के बराबर। नतीजतन बैंकों का पैसा डूब जाता है और बैंक घाटे में चला जाता है।


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