कार्पोरेट समूह पर रिपोर्ट लिखने पर जेल गए रिसर्च एनालिस्ट को कोर्ट ने किया डिस्चार्ज

कार्पोरेट समूह पर रिपोर्ट लिखने पर जेल गए रिसर्च एनालिस्ट को कोर्ट ने किया डिस्चार्ज
इंदौर। कार्पोरेट समूह पर रिपोर्ट लिखने वाले शहर के रिसर्च एनालिस्ट को न्यायालय ने डिस्चार्ज कर दिया। कोर्ट ने माना कि रिसर्च एनालिस्ट के खिलाफ कोई ऐसी साक्ष्य नहीं है जिससे उन्हें दोषी माना जाए। कनाडा की इक्विटी रिसर्च फर्म वेरिटास इंवेस्टर्स रिसर्च कारपोरेशन ने 8 अगस्त, 2012 को कार्पोरेट समूह इंडिया बुल्स के संबंध में एक रिसर्च रिपोर्ट 'बिल्किंग इंडिया' जारी की थी।


कई दिन जेल में बिताना पड़े थे

प्रतिक्रिया स्वरुप कार्पोरेट समूह ने कैनेडियन फर्म, रिपोर्ट के प्रमुख लेखक नीरज मोंगा और सह-लेखक नितिन मंगल, जो कि चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के साथ-साथ रिसर्च एनालिस्ट भी है, उनके विरुद्ध दो अलग-अलग एफआइआर दर्ज करवाई। इनमें फिरौती मांगने, धमकाने, धोखाधड़ी, मानहानि आदि के आरोप लगाए गए थे। प्रकरण दर्ज होने के बाद नितिन मंगल को कई दिन जेल में बिताना पड़े थे।


9 हजार दस्तावेज नष्ट कर दिए थे

इस मामले में हाल ही में न्यायालय ने आदेश जारी किया है। इसमें कहा है कि मंगल पर लगाए आरोपों के संबंध में पुलिस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी है। एडवोकेट अमित दुबे ने बताया कि कोर्ट ने यह भी पाया कि पुलिस रिपोर्ट में जिस व्यक्ति से फिरौती की मांग करना बताया गया वह कभी पुलिस के सामने आया ही नहीं। कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि पुलिस ने अनुसंधान के दौरान जब्त 9 हजार दस्तावेज नष्ट कर दिे जबकि वे प्रकरण में महत्वपूर्ण साक्ष्य थे।


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