सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने स्टॉक मार्केट में सेम-डे-सेटलमेंट लागू करने के पहले कंसल्टेशन पेपर इश्यू किया है। मार्केट रेगुलेटर ने अपने प्रस्ताव पर 12 जनवरी तक लोगों की राय मांगी है।
सेबी ने कंस्लटेशन पेपर में कहा है कि इंस्टेंट सेटलमेंट को दो फेज में लागू किया जाएगा । T+0 सेटलमेंट के पहले फेज में सेम-डे सेटलमेंट लागू किया जाएगा, जिसके बाद खरीदार को उसी दिन शेयर अलॉटमेंट और बेचने वालों को उसी दिन फंड मिल जाएगा।
यानी अगर आप ट्रेडिंग-डे पर 1:30 बजे तक शेयरों का कारोबार करते हैं, तो शाम 4:30 बजे तक उनका सेटलमेंट हो जाएगा। वहीं इसके दूसरे फेज में 3:30 बजे तक किए गए सभी लेनदेन के लिए एक ऑप्शनल इमीडिए टट्रेड-बाय-ट्रेड सेटलमेंट की सुविधा दी जाएगी।
शॉर्ट टाइम सेटलमेंट का यह सिस्टम मौजूदा T+1 साइकल ऑफ सेटलमेंट के साथ एक ऑप्शन होगा। इससे मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ेगी। फिलहाल T+0 सेटलमेंट सिस्टम मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से टॉप-500 लिस्टेड कंपनियों में ट्रेडिंग करने पर लागू होगा।
सेबी चीफ ने कहा था जल्द शुरू होगा इंस्टैंट सेटलमेंट
इससे पहले SEBI चीफ माधुरी पुरी बुच ने कहा था कि मार्केट रेगुलेटर ट्रेड सेटलमेंट नियम में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा था कि हम अगले साल मार्च (2024) तक ट्रेड सेटलमेंट के समय को कम करके 1 घंटे करने और फिर अक्टूबर 2024 तक तुरंत ट्रेड सेटलमेंट लागू करने की तैयारी कर रहे हैं।
जनवरी 2025 तक इंस्टैंट सेटलमेंट होगा लागू
भारत में 2002 से पहले तक T+5 सेटलमेंट का सिस्टम था। SEBI ने 2002 में T+3 सेटलमेंट को लागू किया था। इसके अगले साल 2003 में T+2 सेटलमेंट लागू किया गया। इसके बाद 2021 तक मार्केट इसी सिस्टम पर काम करता रहा।
फिर 2021 में T+1 सिस्टम लाया गया। इसे इसी साल जनवरी (2023) में लागू किया गया। इससे फंड और शेयर का सेटलमेंट 24 घंटे में होना शुरू हो गया। फिलहाल मार्केट इसी सिस्टम पर काम कर रहा है। सेबी के मुताबिक जनवरी 2025 तक T+0 सेटलमेंट सिस्टम पूरी तरह से चलन में आ जाएगा।
क्या है T+1, T+2 और T+3 सेटलमेंट
सेटलमेंट सिस्टम का मतलब बायर अकाउंट में शेयरों का ऑफिशियल ट्रांसफर और सेलर अकाउंट में बेचे गए शेयरों के कैश ट्रांसफर से हैं। भारतीय स्टॉक एक्सचेंज वर्तमान में T+1 को फॉलो करते हैं। इसका मतलब है कि ऑर्डर के एग्जीक्यूट होने के 24 घंटे में फंड और सिक्योरिटी आपके अकाउंट में आ जाएंगे।
मान लीजिए कि आपने बुधवार को शेयर बेचे है। T+1 के अनुसार 1 बिजनेस-डे में इन शेयरों के पैसे आपके अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएंगे। वहीं आपने शेयर खरीदे हैं तो ये शेयर 1 दिन में आपके डिमैट अकाउंट में क्रेडिट हो जाएंगे। यहीं नियम T+2 और T+3 सेटलमेंट में भी लागू होता है।











