ओला इलेक्ट्रिक ने IPO के जरिए 5,500 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बनाई है। कंपनी ने IPO के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) भी फाइल कर दिया है। इसमें 9.52 करोड़ शेयरों का OFS भी शामिल है। अकेले कंपनी के फाउंडर भावेश अग्रवाल 4.73 करोड़ शेयर बेचेंगे। हालांकि IPO की तारीखों को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
15 साल बाद आ रहा किसी दोपहिया कंपनी का IPO
2008 में बजाज ऑटो के शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद यह भारत में किसी दोपहिया निर्माता द्वारा पहला IPO होगा। यानी किसी दोपहिया निर्माता कंपनी का IPO आए हुए 15 साल हो चुके हैं।
ओला इलेक्ट्रिक की मार्केट में 32% हिस्सेदारी
ओला इलेक्ट्रिक इस समय इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन कैटेगरी में मार्केट लीडर के तौर पर उभरी है, कंपनी की नवंबर तक मार्केट हिस्सेदारी लगभग 32% थी। वाहन के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी ने लगभग 30,000 यूनिट्स वाहन की बिक्री की।
DRHP क्या होता है?
DRHP वो डॉक्यूमेंट होते हैं जिसमें IPO की योजना बनाने वाली कंपनी के बारे में आवश्यक जानकारी रहती है। इसे सेबी के पास दाखिल किया जाता है। इसमें कंपनी के फाइनेंस, इसके प्रमोटर, कंपनी में इन्वेस्ट करने के जोखिम, फंड जुटाने के कारण, फंड का उपयोग कैसे किया जाएगा, अन्य बातों के साथ महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाती हैं।
कंपनियां क्यों लाती हैं IPO?
ब्रांडिंग में मदद : एक्सचेंज पर लिस्टिंग के बाद कंपनी की ब्रांडिंग में मदद मिलती है। इससे लोग उस कंपनी के बारे में ज्यादा जानने लगते हैं।
जोखिम का बंटवारा : जब आप कंपनी का शेयर खरीदते हैं तो उसके प्रमोटर की तरह जोखिम में आप भी हिस्सेदार बन जाते हैं। जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि आपके पास कितने शेयर हैं। लेकिन प्रमोटर अपना जोखिम बहुत सारे लोगों में बांटने में जरूर कामयाब हो जाता है।
कारोबार बढ़ाने के लिए : जब भी कोई कंपनी आईपीओ लाने का फैसला करती है तो आमतौर पर वो कारोबार बढ़ाने के लिए पूंजी जुटाना चाहती है। इससे कंपनी को कारोबार के विस्तार के लिए आवश्यक धनराशि मिल जाती है और उसे कर्ज नहीं लेना पड़ता है।











