कई मंत्रियों के टिकट पर संकट के बादल, सिंधिया को भी चुनाव लड़वा सकती है भाजपा

कई मंत्रियों के टिकट पर संकट के बादल, सिंधिया को भी चुनाव लड़वा सकती है भाजपा

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भले गुजरात का फार्मूला लागू न किया जा सके, लेकिन भारतीय जनता पार्टी कई मंत्रियों-विधायकों के टिकट काटने पर विचार कर रही है। दरअसल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कैबिनेट के कई मंत्री ऐसे हैं, जिनके क्षेत्र में उनका भारी विरोध है। पार्टी के सर्वे में भी वे अच्छी स्थिति में नहीं हैं। पार्टी उन मंत्रियों की जगह नए चेहरे उतारने पर विचार कर रही है।

कांग्रेस से भाजपा में आए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक मंत्री सुरेश धाकड़, ओपीएस भदौरिया के अलावा रामखेलावन पटेल, बृजेंद्र प्रताप सिंह, प्रेम सिंह पटेल, बृजेंद्र सिंह यादव जैसे मंत्रियों के क्षेत्र में भी नए चेहरे उतारे जा सकते हैं। शिवपुरी से मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया की जगह ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव लड़ाने पर भी पार्टी विचार कर रही है। पार्टी यशोधरा राजे को 2024 में लोकसभा चुनाव लड़ा सकता है। अगर समीकरण नहीं जमे तो ज्योतिरादित्य को भी लोकसभा चुनाव लड़ाया जा सकता है। वे वर्तमान में राज्य सभा सदस्य हैं।

पार्टी नेताओं के अनुसार भाजपा अक्टूबर के पहले सप्ताह में अधिकतर सीटों पर प्रत्याशियों का फैसला कर सकती है। इसी पर चर्चा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक अक्टूबर को भोपाल आ रहे हैं। वे वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रत्याशी चयन पर चर्चा करेंगे।

जिताऊ नेताओं को दिया जाएगा टिकट

अमित शाह ने केंद्रीय स्तर पर सभी सीटों का सर्वे करवाया है। सर्वे में जिन दावेदारों को जिताऊ बताया है, उन्हीं में से किसी को प्रत्याशी बनाया जा सकता है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए जिन मंत्रियों के टिकट काटे जा सकते हैं, उनमें शिवपुरी जिले में पोहरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सुरेश धाकड़ राजखेड़ा का नाम भी कमजोर प्रदर्शन वाले नेताओं की सूची में शामिल है। धाकड़ को लेकर सर्वे में स्थिति ठीक नहीं है।

भिंड जिले में एक ही जाति के तीन विधायक

भिंड जिले के मेहगांव विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2018 में भदौरिया कांग्रेस के टिकट पर जीते थे। 2020 में वे सिंधिया के साथ कमल नाथ गिराने वाले विधायकों में शामिल थे। उपचुनाव में वे भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत गए। भदौरिया के साथ दिक्कत ये है कि भिंड जिले में तीन विधायक एक ही जाति के हो गए हैं।

अटेर से अरविंद सिंह भदौरिया हैं और भिंड से संजीव सिंह कुशवाह बहुजन समाज पार्टी से जीते थे, लेकिन कुछ महीनों पहले वे भाजपा में शामिल हो गए थे। ऐसी स्थिति में अरविंद सिंह भदौरिया और संजीव सिंह कुशवाह का टिकट भाजपा काटने के पक्ष में नहीं है, इसलिए ओपीएस भदौरिया के नाम पर कैंची चल सकती है।

बृजेंद्र प्रताप सिंह की स्थिति कमजोर

पन्ना विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित बृजेंद्र प्रताप सिंह की भी सर्वे में स्थिति कमजोर है। सतना के सांसद गणेश सिंह को टिकट दिए जाने के कारण मंत्री रामखेलावन पटेल का टिकट बदले जाने पर पार्टी विचार कर रही है। दोनों अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से आते हैं। पार्टी एक जिले में दो समान जाति के प्रत्याशी उतारने के पक्ष में नहीं है।

मंत्री पटेल का क्षेत्र में विरोध

मंत्री प्रेम सिंह पटेल आदिवासी क्षेत्र से चुने जाते हैं, लेकिन उनका क्षेत्र में विरोध बहुत ज्यादा है। पटेल की जीत 38 हजार से ज्यादा वोटों की होने से उनकी सीट बदली जा सकती है या फिर सांसद गजेंद्र पटेल की जगह उन्हें लोकसभा लड़ाया जा सकता है। गजेंद्र को भी पार्टी विधानसभा चुनाव में उतारने वाली है। मंत्री बृजेंद्र सिंह यादव का टिकट भी मुंगावली से खतरे में है।

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