भोपाल। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को “पक्के सपनों का घर” देने का दावा अब सवालों के घेरे में है। राजधानी भोपाल में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने कई मकानों में कब्जा मिलने से पहले ही दरारें पड़ने लगी हैं। कहीं प्लास्टर उखड़ रहा है, कहीं पाइपलाइन लीक हो रही है, तो कहीं बिजली कनेक्शन तक अधूरे हैं।
हितग्राहियों का आरोप है कि मॉडल हाउस दिखाकर बेहतर सुविधाओं का वादा किया गया, लेकिन वास्तविक निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोग अधूरे और बदहाल मकानों में रहने को मजबूर हैं।
यहां बनाए गए आवास
राजधानी में रासलाखेड़ी, 12 नंबर बस स्टाप, कलखेड़ा और गंगानगर में योजना के तहत पीएम आवास बनाए गए हैं।
इन प्रोजेक्ट्स में निर्माण गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि नगर निगम से कई बार शिकायत करने के बावजूद केवल आश्वासन मिल रहे हैं, कार्रवाई नहीं।
क्या हैं लोगों की शिकायतें?
- गृहप्रवेश से पहले ही दीवारों और छतों में दरारें
- जगह-जगह प्लास्टर उखड़ा, पाइपलाइन और सीलन की समस्या
- मॉडल हाउस जैसी सुविधाएं वास्तविक फ्लैट्स में नहीं मिलीं
हितग्राहियों ने क्या कहा?
रासलाखेड़ी प्रोजेक्ट के हितग्राही डॉ. शैलेष मिश्रा का कहना है कि मॉडल में बेहतर रेलिंग, वायरिंग और सुविधाएं दिखाई गई थीं, लेकिन वास्तविक निर्माण बेहद कमजोर निकला।
वहीं 12 नंबर बस स्टाप प्रोजेक्ट के हितग्राही कुमार अशेष ने आरोप लगाया कि टाइल्स, प्लास्टर और बिजली व्यवस्था तक खराब गुणवत्ता की है। कई जगह सीलन और दरारें साफ दिखाई देने लगी हैं।
नगर निगम का क्या कहना है?
12 नंबर प्रोजेक्ट को पूर्व में जिस ठेकेदार द्वारा निर्माण किया जा रहा था, उसका टेंडर निरस्त कर दिया गया है। जहां भी सुधार हो सकता है उसे सुधारा जा रह है। अन्य प्रोजेक्ट में भी यदि इस तरह की शिकायतें आ रही हैं तो उन्हें भी दिखवा लेते हैं।- तन्मय वशिष्ठ शर्मा, अपर आयुक्त, नगर निगम, भोपाल











