सूत्रों ने बताया कि रिलायंस ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज कंटेनर असेंबली और सेल प्रोडक्शन दोनों के लिए कुछ मशीनरी आयात की है। लेकिन चीनी तकनीक तक पहुंच न होने के कारण सेल बनाने का काम रुका हुआ है। चीन ने कुछ खास सेक्टरों में अपनी तकनीक को बाहर जाने से रोकने के लिए नए नियम बनाए हैं। इस झटके के बाद रिलायंस अब बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) बनाने पर ध्यान दे रही है, जिनमें उसकी रिन्यूएबल पावर परियोजनाओं के लिए बिजली स्टोर की जा सके। चीन अब क्लीन एनर्जी से जुड़ी टेक्नोलॉजी के सौदों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। वह अपनी रणनीतिक बढ़त को बनाए रखना चाहता हैं। इससे विदेशी कंपनियों के लिए भारत में लोकल मैन्युफैक्चरिंग करना मुश्किल हो रहा है।
कंपनी ने क्या कहा
रिलायंस के एक प्रवक्ता ने ईमेल के जरिए बताया कि कंपनी की योजनाओं में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा, 'आप देखेंगे कि BESS मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी पैक मैन्युफैक्चरिंग और सेल मैन्युफैक्चरिंग हमेशा से हमारी एनर्जी स्टोरेज योजनाओं का हिस्सा रहे हैं और हम इन्हें लागू करने में अच्छी प्रगति कर रहे हैं।'उन्होंने चीनी कंपनी के साथ अपने रिश्ते के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया। चीनी कंपनी ने भी टिप्पणी के अनुरोध पर कोई जवाब नहीं दिया।भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी ने पिछले अगस्त में शेयरधारकों को बताया था कि रिलायंस की बैटरी बनाने की गीगाफैक्ट्री 2026 में शुरू हो जाएगी। रिलायंस ने साल 2021 में चार गीगाफैक्ट्री बनाने की घोषणा की थी। यह ग्रीन एनर्जी बिजनेस पर 10 अरब डॉलर के निवेश का हिस्सा था। सूत्रों का कहना है कि रिलायंस की अंदरूनी टीमों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि अगर चीन की भरोसेमंद सेल तकनीक नहीं मिली, तो लागत बहुत बढ़ जाएगी और काम पूरा करने में भी ज्यादा जोखिम होगा।











