इको-फ्रेंडली माटी के गणेश गढ़कर बच्चों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

इको-फ्रेंडली माटी के गणेश गढ़कर बच्चों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
भोपाल। भगवान श्री गणेश के प्रति श्रद्धा, आस्था और विश्वास के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से रायसेन रोड, पटेल नगर स्थित जागृत एवं दर्शनीय तीर्थ स्थल दादाजी धाम मंदिर में दादाजी धाम मंदिर एवं संस्था नर्मदा समग्र न्यास के संयुक्त तत्वावधान में इको-फ्रेंडली माटी के श्री गणेश प्रतिमा निर्माण की निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रशिक्षक श्री मनोज जोशी ने बच्चों, महिलाओं एवं श्रद्धालुओं को प्राकृतिक मिट्टी से भगवान श्री गणेश की प्रतिमा बनाने की विधि समझाई। उन्होंने माटी को उचित आकार देने, गणेशजी के स्वरूप को सुंदर एवं आकर्षक रूप प्रदान करने तथा प्रतिमा को प्राकृतिक रूप में तैयार करने की विभिन्न बारीकियों की जानकारी दी। प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह, भक्ति और श्रद्धाभाव के साथ अपने हाथों से विघ्नहर्ता श्री गणेश की प्रतिमाएं तैयार कीं।
इस अवसर पर श्री श्री 1008 श्री दादाजी गुरुदेव चैरिटेबल ट्रस्ट भोपाल की ओर से सभी प्रतिभागियों को निःशुल्क प्राकृतिक माटी उपलब्ध कराई गई, जिससे प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी आर्थिक बाधा के पर्यावरण हितैषी प्रतिमा बना सके। ट्रस्ट के इस सहयोग से बच्चों एवं श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
कार्यशाला की विशेष पहल के अंतर्गत तैयार की गई माटी की गणेश प्रतिमाओं के भीतर पपीते के बीज भी रखे गए। प्रतिभागियों को बताया गया कि गणेशोत्सव के पश्चात प्रतिमा को किसी जलस्रोत में विसर्जित करने के स्थान पर घर में रखे गमले की मिट्टी में ही विधिपूर्वक विसर्जित किया जा सकता है। प्राकृतिक माटी के साथ बीज भी मिट्टी में मिल जाएंगे और उचित देखभाल मिलने पर उनमें से पपीते के पौधे अंकुरित होंगे। इस प्रकार गणेश आराधना के साथ प्रकृति संरक्षण और हरियाली का संदेश भी घर-घर पहुंचेगा।
इस अवसर पर बच्चों, महिलाओं एवं पुरुषों को संकल्प दिलाया गया कि वे माटी की गणेश प्रतिमा को अपने घर के गमले में विसर्जित करेंगे, जल एवं पर्यावरण को प्रदूषण से बचाएंगे तथा अधिक से अधिक लोगों को पर्यावरण हितैषी गणेशोत्सव के लिए प्रेरित करेंगे।
बच्चों ने उत्साहपूर्वक कहा कि “हम अगले वर्ष भी माटी के गणेशजी ही बनाएंगे, उन्हें श्रद्धापूर्वक अपने घर में स्थापित करेंगे और विसर्जन के बाद उनसे पौधा तैयार कर पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान देंगे।” बच्चों के इस संकल्प ने कार्यशाला को विशेष भावनात्मक एवं प्रेरणादायी स्वरूप प्रदान किया।
मंदिर के आध्यात्मिक वातावरण में माटी को भगवान श्री गणेश के स्वरूप में ढालते हुए श्रद्धालुओं ने यह संदेश दिया कि धर्म और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। भगवान श्री गणेश बुद्धि, विवेक, शुभता एवं मंगल के प्रतीक हैं। उनकी पूजा-अर्चना के साथ प्रकृति और जलस्रोतों को स्वच्छ रखना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
अध्यक्ष शिवरतन नामदेव, कोषाध्यक्ष अखिलेश श्रीवास्तव तथा मंदिर व्यवस्था समिति के आर.डी. धुर्वे, हर्ष एवं अन्य सदस्यों ने कहा कि बच्चों को धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संस्कार देना आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। माटी से प्रतिमा निर्माण केवल कला सीखने की गतिविधि नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को प्रकृति, संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ने का सार्थक माध्यम है।
उन्होंने कहा कि श्री श्री 1008 श्री दादाजी गुरुदेव चैरिटेबल ट्रस्ट दादाजी धाम मंदिर एवं नर्मदा समग्र न्यास का यह संयुक्त प्रयास श्रद्धा के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक पहल है। प्रशिक्षक श्री मनोज जोशी के मार्गदर्शन एवं समन्वयक श्री अभय खरे के सहयोग से बच्चों, महिलाओं एवं श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक माटी की प्रतिमाएं तैयार कीं।
कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों ने प्रकृति को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने, जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने, माटी की गणेश प्रतिमाओं को बढ़ावा देने तथा अपने घरों में पौधे लगाने का संकल्प लिया।
“श्रद्धा से गणेश गढ़ें, संस्कारों को आगे बढ़ाएं, माटी में हरियाली का बीज बोएं और प्रकृति को सुरक्षित रखें यही इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव का सच्चा संदेश है।”
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