अटल के किताब के विमोचन के दौरान हुआ गुरुघंटाल वाला किस्सा
कन्हैया लाल नंदन ने अपनी किताब 'क्या खोया, क्या पाया' में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हाजिरजवाबी का जिक्र करते हुए गुरु और गुरुघंटाल वाले वाकये का जिक्र किया है। घटना दिल्ली के फिक्की ऑडोटोरियम की है, जहां अटल बिहारी वाजपेयी की किताब मेरी इक्यावन कविताओं का विमोचन के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया था। तब अटल बिहारी नेता प्रतिपक्ष थे और तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव किताब का विमोचन करने आए थे। कार्यक्रम में नरसिम्हा राव ने अटलजी को गुरु बोल दिया। फिर अटलजी की बारी आई। उन्होंने जवाब दिया कि अगर मैं गुरु हूं तो आप गुरुघंटाल हैं। पत्रकार नीरजा चौधरी ने भी एक इंटरव्यू में अटल बिहारी वाजपेयी और पी वी नरसिंह राव से उनकी मित्रता का जिक्र किया है। जनसंघ के अलावा दूसरे दलों के नेताओं से अटल बिहारी की मित्रता रही। अटल ने कभी अपनी दोस्ती को छिपाने की कोशिश नहीं की। जब नरसिंह राव से दोस्ती को लेकर उनसे सवाल किया गया तो अटल बिहारी ने जवाब दिया कि मैं कभी दोस्ती किसी से पूछकर नहीं करता हूं।
कन्हैया लाल नंदन ने अपनी किताब 'क्या खोया, क्या पाया' में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हाजिरजवाबी का जिक्र करते हुए गुरु और गुरुघंटाल वाले वाकये का जिक्र किया है। घटना दिल्ली के फिक्की ऑडोटोरियम की है, जहां अटल बिहारी वाजपेयी की किताब मेरी इक्यावन कविताओं का विमोचन के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया था। तब अटल बिहारी नेता प्रतिपक्ष थे और तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव किताब का विमोचन करने आए थे। कार्यक्रम में नरसिम्हा राव ने अटलजी को गुरु बोल दिया। फिर अटलजी की बारी आई। उन्होंने जवाब दिया कि अगर मैं गुरु हूं तो आप गुरुघंटाल हैं। पत्रकार नीरजा चौधरी ने भी एक इंटरव्यू में अटल बिहारी वाजपेयी और पी वी नरसिंह राव से उनकी मित्रता का जिक्र किया है। जनसंघ के अलावा दूसरे दलों के नेताओं से अटल बिहारी की मित्रता रही। अटल ने कभी अपनी दोस्ती को छिपाने की कोशिश नहीं की। जब नरसिंह राव से दोस्ती को लेकर उनसे सवाल किया गया तो अटल बिहारी ने जवाब दिया कि मैं कभी दोस्ती किसी से पूछकर नहीं करता हूं।
अटल बिहारी को गुरुदेव क्यों कहते थे चंद्रशेखर, खुद ही बताया था
अटलजी की राजनीतिक सहिष्णुता का आलम यह था कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी हमेशा गुरुदेव ही बुलाते रहे। अपनी किताब 'रहबरी के सवाल' में खुद चंद्रशेखर लिखते हैं कि उन्होंने कब, कैसे और क्यों अटलजी को गुरुदेव कहना शुरू किया, यह याद नहीं। मगर एक इंटरव्यू में कहा कि वह उम्र में अटल बिहारी से छोटे थे, इसलिए वह उन्हें गुरुदेव कहते थे। जब कभी भी संसद में अटल के भाषण में विरोधी नेता शोरगुल करते तो चंद्रशेखर ने हस्तक्षेप करने में चूक नहीं की। मगर राजनीति में कई ऐसे मौके आए जब चंद्रशेखर ने अटल बिहारी की नीतियों की आलोचना करने से नहीं चूके। गोधरा दंगे के बाद उन्होंने अटलजी से कहा था कि अगर आप सर्वोच्च पद पर रहते हुए भी देश का काम नहीं कर पाएं तो आपको हट जाना चाहिए। संसद में कई ऐसे मौके आए, जब चंद्रशेखर ने गुरुदेव संबोधन के साथ अटल बिहारी से तीखे सवाल भी किए। स्वदेशी और उदारीकरण के मुद्दों पर उन्होंने अटल बिहारी को संसद में घेरा था।
अटलजी की राजनीतिक सहिष्णुता का आलम यह था कि उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी हमेशा गुरुदेव ही बुलाते रहे। अपनी किताब 'रहबरी के सवाल' में खुद चंद्रशेखर लिखते हैं कि उन्होंने कब, कैसे और क्यों अटलजी को गुरुदेव कहना शुरू किया, यह याद नहीं। मगर एक इंटरव्यू में कहा कि वह उम्र में अटल बिहारी से छोटे थे, इसलिए वह उन्हें गुरुदेव कहते थे। जब कभी भी संसद में अटल के भाषण में विरोधी नेता शोरगुल करते तो चंद्रशेखर ने हस्तक्षेप करने में चूक नहीं की। मगर राजनीति में कई ऐसे मौके आए जब चंद्रशेखर ने अटल बिहारी की नीतियों की आलोचना करने से नहीं चूके। गोधरा दंगे के बाद उन्होंने अटलजी से कहा था कि अगर आप सर्वोच्च पद पर रहते हुए भी देश का काम नहीं कर पाएं तो आपको हट जाना चाहिए। संसद में कई ऐसे मौके आए, जब चंद्रशेखर ने गुरुदेव संबोधन के साथ अटल बिहारी से तीखे सवाल भी किए। स्वदेशी और उदारीकरण के मुद्दों पर उन्होंने अटल बिहारी को संसद में घेरा था।











