केंद्रीय महिला कर्मचारी अब पति के बजाय अपने बच्चे को फैमिली पेंशन के लिए नॉमिनी बना सकेंगी। इसका फायदा सिर्फ घरेलू हिंसा का केस लड़ रही या डिवोर्स की प्रोसीडिंग्स में शामिल महिला कर्मचारी या पेंशनर को मिलेगा। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने आज यानी 2 जनवरी को इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया गया है।
डिपार्टमेंट ऑफ पेंशन एंड पेंशनर्स वेलफेयर (DoPPW) ने सेंट्रल सिविल सर्विस (पेंशन) रुल 2021 में इसके लिए जरूरी बदलाव किए हैं, जिसके बाद एम्प्लॉइज को यह अनुमति देने के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया गया है। DoPPW के सचिव वी श्रीनिवास ने कहा,'मिनिस्ट्री ऑफ वीमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट से मिले रिप्रेजेंटेशन को ध्यान में रखते हुए नियम में बदलाव किए हैं।'
नाबालिग या विकलांग बच्चे के मामले में अभिभावक को मिलेगी पेंशन
मंत्रालय ने आगे बताया कि किसी मृत सरकारी महिला कर्मचारी का वह बच्चा जिसे उसने नॉमिनेट किया था वह तभी पात्र होगा जब वह वयस्क हो। नाबालिग या विकलांग बच्चे के मामले में पेंशन अभिभावक को मिलेगी। बच्चा वयस्क होने के बाद पेंशन पाने के लिए एलिजिबल होगा।
काफी विचार-विमर्श के बाद सरकार ने दी अनुमति
मंत्रालय ने कहा कि पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग को अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों इसके बारे में लेटर मिल रहे थे, जिसमें सलाह मांगी गई थी कि क्या एक महिला सरकारी कर्मचारी को विवाह से जुड़े किसी विवाद के मामले में उसके पति के स्थान पर फैमिली पेंशन के लिए अपने पात्र बच्चे/बच्चों को नॉमिनेट करने की अनुमति दी जा सकती है। काफी विचार-विमर्श के बाद सरकार ने महिला कर्मचारियों को इसकी अनुमति दी है।
सभी के लिए क्या हैं नियम?
वर्तमान नियमों के मुताबिक, किसी सरकारी कर्मचारी के मृत्यु के बाद फैमिली पेंशन सबसे पहले उसके पति या पत्नी को दी जाती है। यदि मृत सरकारी कर्मचारी का जीवन साथी फैमिली पेंशन के लिए अयोग्य हो या उसकी मौत हो गई हो तभी बच्चे या परिवार के कोई सदस्य फैमिली पेंशन के लिए पात्र होते हैं।
अभी भी सभी के लिए यही नियम लागू हैं। केवल डोमेस्टिक वायलेंस के केस और डिवोर्स की प्रोसीडिंग्स के मामले में पति के बजाय बच्चे को नॉमिनेट करने की छूट दी गई है।











