इस साल BRICS की मेजबानी दक्षिण अफ्रीका कर रहा है, जिसने अफ्रीकी देशों समेत 67 देशों को बैठक में आने का न्योता दिया है। 30 देशों के नेता इस बैठक में शामिल होने की पुष्टि कर चुके हैं। शिखर सम्मेलन में भागीदारी और इसके परिणामों के कारण दुनिया का ध्यान इसकी तरफ है। अभी तक इस शिखर सम्मेलन का प्राथमिक लक्ष्य विस्तार के ईर्द-गिर्द घूम रहा है। माना जा रहा है कि इस सम्मेलन में विस्तार से जुड़े दिशानिर्देशों की अपेक्षित घोषणा और इसमें शामिल करने लायक देशों की पहचान की जाएगी।
ब्रिक्स के विस्तार का दक्षिण अफ्रीका में होगा फैसला, भारत के लिए महत्वपूर्ण है मीटिंग, पहुंचेंगे पीएम मोदी
जोहान्सबर्ग: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सप्ताह एक महत्वपूर्ण राजनयिक यात्रा शुरू करेंगे। वह दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में 15वें ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पहुंचेंगे। 22 से 24 अगस्त तक यह शिखर सम्मेलन चलेगा, जो एक प्रमुख राजनयिक भागीदारी का प्रतीक है। ऐसा इसलिए क्योंकि 2019 के बाद यह पहला व्यक्तिगत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होगा। BRICS ब्लॉक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका आते हैं। यह दुनिया की 42 फीसदी आबादी और 27 फीसदी ग्लोबल जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
ब्रिक्स में शामिल होना चाहता है ईरान
ब्रिक्स शेरपाओं की एक रिपोर्ट, जो समूह के भीतर चर्चा का नेतृत्व करती है, पिछले महीने विदेश मंत्रियों को सौंपी गई थी। यह रिपोर्ट शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं को प्रस्तुत की जाएगी, जो विस्तार पर अंतिम निर्णय को प्रभावित करेगी। ब्रिक्स शेरपाओं की एक रिपोर्ट पिछले महीने विदेश मंत्रियों को सौंपी गई थी। यह रिपोर्ट शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं के सामने रखी जाएगी जो इस ब्लॉक के विस्तार पर अंतिम निर्णय को प्रभावित करेगी। ईरान ब्रिक्स में शामिल होना चाहता है। ईरानी राष्ट्रपति ने पिछले सप्ताह पीएम मोदी के साथ चर्चा की थी।
ये देश भी ब्रिक्स में होना चाहते हैं शामिल
ब्रिक्स में शामिल होने के लिए 20 से ज्यादा देशों ने दक्षिण अफ्रीका को अपनी रुचि दिखाई है। इनमें अल्जीरिया, अर्जेंटीना, बांग्लादेश, बहरीन, बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, मिस्र, इथियोपिया, होंडुरास, इंडोनेशिया, ईरान, कजाकिस्तान, कुवैत, नाइजीरिया, फिलिस्तीन, सऊदी अरब, सेनेगल, थाईलैंड, यूएई, वेनेजुएला और वियतनाम शामिल हैं। इस शिखर सम्मेलन में पर्याप्त अफ्रीकी प्रतिनिधित्व है, जो भारत और अफ्रीकी देशों के साथ संबंध बढ़ाने का अवसर बन सकता है।











