रेकॉर्ड कीमत पर पहुंची बिटकॉइन, क्या खरीदने का है प्लान? जानें भारत में क्रिप्टो खरीदना कानूनी है या नहीं

रेकॉर्ड कीमत पर पहुंची बिटकॉइन, क्या खरीदने का है प्लान? जानें भारत में क्रिप्टो खरीदना कानूनी है या नहीं
डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी चुनाव जीतने के बाद क्रिप्टोकरेंसी में बहार आ गई है। बिटकॉइन अपने रेकॉर्ड हाई पर है। बुधवार सुबह इसकी वैल्यू करीब 88 हजार डॉलर थी। हालांकि एक दिन पहले इसकी वैल्यू करीब 90 हजार डॉलर पहुंच गई थी। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बिटकॉइन अब दुनिया के आठवां सबसे बड़ा असेट बन गया है। ऐसे में आम निवेशकों की बिटकॉइन को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है। उनके मन में तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं। क्या भारत में बिटकॉइन और दूसरी क्रिप्टो करेंसी खरीदना कानूनी तौर पर सही है?

क्या क्रिप्टो करेंसी खरीदना कानूनी है?


जी हां, भारत में बिटकॉइन और दूसरी क्रिप्टो करेंसी खरीदना कानूनी है। निवेशक भारत सरकार द्वारा रजिस्टर्ड एक्सचेंजेस से इसे खरीद सकते हैं। हालांकि, इसे करेंसी के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। यह सिर्फ एक इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट है।

कहां से खरीदें क्रिप्टो करेंसी?


ये पता लगाने के लिए कि आप सही जगह से क्रिप्टो खरीद रहे हैं, आपको ये देखना होगा कि वो प्लैटफॉर्म FIU (फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ऑफ इंडिया) के पास रजिस्टर्ड है या नहीं। FIU, भारत में फाइनेंशियल लेनदेन पर नजर रखने वाली एक एजेंसी है। जब आप किसी प्लैटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन करेंगे, तो आपको अपना आधार और PAN कार्ड रजिस्टर्ड कराना होगा। इस प्रक्रिया को KYC कहा जाता है।


बिटकॉइन कैसे खरीदें?


Bitcoin खरीदने के लिए, आपको पहले FIU से अप्रूव्ड प्लैटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके बाद, आप खास अमाउंट से बिटकॉइन को सीधे खरीद सकते हैं। इसके अलावा आप प्लैटफॉर्म की ओर से दी जा रही सर्विस के अनुसार SIP का चुनाव कर सकते हैं। Bitcoin खरीदने के लिए आपको पहले प्लैटफॉर्म के वॉलेट में फंड जमा करने होंगे। क्रिप्टो खरीदने के बाद उसे एक्सचेंज द्वारा तय किए गए वॉलेट में स्टोर किया जा सकता है।


क्या पूरा बिटकॉइन खरीदना जरूरी है?


आप बिटकॉइन का एक हिस्सा भी खरीद सकते हैं और अपनी सुविधानुसार इसमें निवेश की जाने वाली रकम तय कर सकते हैं। कुछ प्लैटफॉर्म पर 100 रुपये से भी शुरुआत की जा सकती है।


क्रिप्टो पर किस तरह के टैक्स लगते हैं?


क्रिप्टो करेंसी से होने वाला प्रॉफिट इनकम टैक्स के दायरे में आता है। इसे बेचने पर इससे होने वाले मुनाफे पर आपको 30% का टैक्स देना होगा। ऐसे लेनदेन पर 1% अतिरिक्त TDS भी लगता है।

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