अरबपति एलन मस्‍क ने कनाडाई पीएम की लगाई क्‍लास, कहा- जस्टिन ट्रूडो फ्री स्‍पीच को कुचलने में लगे

अरबपति एलन मस्‍क ने कनाडाई पीएम की लगाई क्‍लास, कहा- जस्टिन ट्रूडो फ्री स्‍पीच को कुचलने में लगे
सैन फ्रांसिस्‍को: कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो जो खालिस्‍तानियों के लिए फ्री स्‍पीच यानी अभिव्‍यक्ति की आजादी की वकालत करते हैं, अब इसी मामले में निशाने पर हैं। टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने सोमवार को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की आलोचना की। मस्‍क अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने की कोशिश के आरोपों के साथ ही ट्रूडो पर जमकर बरसे। उन्‍होंने ट्रूडो के रुख को 'शर्मनाक' बताया है। मस्‍क ने कनाडा सरकार द्वारा ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्मों के लिए पंजीकरण अनिवार्य करने के बाद प्रतिक्रिया व्यक्त की।

मस्‍क बोले, बहुत शर्मनाक
लेखक-पत्रकार ग्लेन ग्रीनवाल्ड ने एक्स पर पोस्ट किया, 'दुनिया की सबसे दमनकारी ऑनलाइन सेंसरशिप योजनाओं में से एक से लैस कनाडाई सरकार ने घोषणा की है कि पॉडकास्ट की पेशकश करने वाली सभी ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सेवाओं को अनुमति के लिए औपचारिक रूप से पंजीकृत होना चाहिए।' मस्‍क ने इस पर प्रतिक्रिया दी और लिखा, 'ट्रूडो ट्रूडो कनाडा में अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने की कोशिश कर रहे हैं। शर्मनाक।' जब उनके एक फॉलोअर ने पोस्ट किया कि ट्रूडो को अपना नाम बदलकर 'फाल्सेड्यू' कर लेना चाहिए, तो टेक अरबपति ने रोते हुए चेहरे वाले इमोजी के साथ प्रतिक्रिया व्यक्त की।

पहले भी लगे आरोप
मस्‍क का कनाडा के साथ गहरा रिश्‍ता है। उनकी मां माए मस्‍क कनाडा की ही रहने वाली हैं। यह पहली बार नहीं है कि ट्रूडो सरकार पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ काम करने का आरोप लगा है। पिछले साल फरवरी में, कनाडाई सरकार ने, देश के इतिहास में पहली बार, ट्रक ड्राइवरों के विरोध के जवाब में आपातकालीन शक्तियां लागू कीं। ये वो ड्राइवर्स थे जो उस समय वैक्सीन जनादेश का विरोध कर रहे थे।

भारत को दी फ्री स्‍पीच की दुहाई
ट्रूडो को मस्क ने ऐसे समय में फटकारा है जब कनाडा और भारत के बीच विवाद जारी है। ट्रूडो ने कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत के शामिल होने का आरोप लगाया है। उनके आरोपों के बाद से ही दोनों देशों के बीच राजनयिक विवाद जारी है। ट्रूडो ने भारत में हुए जी20 शिखर सम्‍मेलन के बाद खालिस्तान को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्‍होंने इसे एक समुदाय की अभिव्‍यक्ति की आजादी का तरीका बताकर भारत की चिंताओं से किनारा कर लिया था। साथ ही उन्‍होंने कहा था कि आतंरिक मामलों में विदेशी हस्‍तक्षेप बर्दाश्‍त नहीं है।

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