नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस सख्त कार्रवाई से सार्वजनिक रूप से कूड़ा फेंकने पर रोक लग रही है, लेकिन निवासियों में इस तरीके को लेकर तीखी राय है। बनसवाड़ी निवासी रमेश कुमार ने कहा कि यह अच्छी बात है क्योंकि लोग अब सावधानी बरत रहे हैं और कचरा बाहर नहीं फेंक रहे हैं, उन्हें डर है कि कहीं यह उनके दरवाज़े पर वापस न फेंक दिया जाए। उन्होंने आगे कहा कि लोगों को आखिरकार एहसास हो गया है कि नगर निगम का काम गंभीर है।
बेंगलुरु में डोर टू डोर कूड़ा उठाने का नहीं, फेंकने का चल रहा कैंपेन, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
बेंगलुरु : ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) और बेंगलुरु सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड (BSWML) ने शहर को साफ-सुधरा बनाने की एक मुहिम शुरू की है। इस मुहिम के तहत डोर टू डोर कूड़ा फेंका जा रहा है। आप सोच रहे होंगे की घर-घर जाकर कूड़ा उठाने की जगह फेंका जा रहा है? यह कैसा सफाई अभियान है? पर हां... ऐसा ही हो रहा है। दरअसल जो लोग अपने घरों आसपास कूड़ा फेंकते हैं। उन पर निगरानी की जा रही है और फिर कूड़ा उठाकर वापस उनके घर पर फेंका जा रहा है। अब तक बेंगलुरु में लगभग 190 घरों के दरवाज़ों के ठीक बाहर कचरा डाला जा चुका है।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस सख्त कार्रवाई से सार्वजनिक रूप से कूड़ा फेंकने पर रोक लग रही है, लेकिन निवासियों में इस तरीके को लेकर तीखी राय है। बनसवाड़ी निवासी रमेश कुमार ने कहा कि यह अच्छी बात है क्योंकि लोग अब सावधानी बरत रहे हैं और कचरा बाहर नहीं फेंक रहे हैं, उन्हें डर है कि कहीं यह उनके दरवाज़े पर वापस न फेंक दिया जाए। उन्होंने आगे कहा कि लोगों को आखिरकार एहसास हो गया है कि नगर निगम का काम गंभीर है।
जुर्माना लगाया जा रहा
बीएसडब्ल्यूएमएल के प्रबंध निदेशक कारी गौड़ा के अनुसार, कई जागरूकता अभियानों के बावजूद कचरा फैलाने पर रोक नहीं लग पाने के बाद यह अभियान शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि हम एक कड़ा संदेश देने के लिए सख्त कदम उठा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि उल्लंघन करने वालों पर 2,000 रुपये से 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है।
घटे ब्लैक स्पॉट
अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान, जिसने पहले ही कूड़े के ब्लैक स्पॉट को 869 से घटाकर 150 करने में मदद की है, उद्देश्यानुसार काम कर रहा है। लेकिन जैसे-जैसे बेंगलुरु नामकरण, शर्मिंदगी और डंपिंग की नैतिकता पर बहस कर रहा है, संदेश स्पष्ट है कि शहर उन लोगों के प्रति धैर्य खो चुका है जो उसकी सड़कों को कूड़ेदान की तरह इस्तेमाल करते हैं।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस सख्त कार्रवाई से सार्वजनिक रूप से कूड़ा फेंकने पर रोक लग रही है, लेकिन निवासियों में इस तरीके को लेकर तीखी राय है। बनसवाड़ी निवासी रमेश कुमार ने कहा कि यह अच्छी बात है क्योंकि लोग अब सावधानी बरत रहे हैं और कचरा बाहर नहीं फेंक रहे हैं, उन्हें डर है कि कहीं यह उनके दरवाज़े पर वापस न फेंक दिया जाए। उन्होंने आगे कहा कि लोगों को आखिरकार एहसास हो गया है कि नगर निगम का काम गंभीर है।











