सरकारी-प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के चार्ज में बड़ा अंतर, राज्यों से बात करेगा केंद्र, देखें डिटेल्स
नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय देश भर के अस्पतालों (Hospitals) में इलाज के लिए स्टैंडर्ड कॉस्ट तय करने के मुद्दे पर इस हफ्ते राज्य सरकारों के साथ बातचीत शुरू करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के बीच इलाज की लागत में बड़े अंतर को लेकर चिंता जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को छह हफ्ते का समय दिया है। इसे इस रूप में समझ सकते हैं कि अगर कोई सरकारी अस्पताल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने जाता है तो एक आंख के लिए लगभग 10,000 रुपये तक का खर्च आ सकता है। जबकि प्राइवेट अस्पताल में यही खर्च 30,000 रुपये से 1,40,000 रुपये तक जा सकता है। इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाज में खर्च होने वाले कॉस्ट के इस गैप, रेट तय करने में केंद्र की कथित नाकामी की सुप्रीम कोर्ट ने आलोचना की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हेल्थ सर्विस नागरिकों का मौलिक अधिकार है। सरकार इस अधिकार को सुनिश्चित करने में अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती है।











